नई मुसीबतः ठगों से जुड़े ट्रांजेक्शन में फंस रहे निर्दोष व्यापारी

इंदौर:ऑनलाइन ठगी रोकने के लिए बनाए गए सिस्टम ने अब ईमानदार व्यापारियों की नींद उड़ा दी है. साइबर ठगी की शिकायत के बाद जिस-जिस खाते में ठगों का पैसा पहुंचता है, उन सभी खातों को ब्लॉक कर दिया जाता है. लेकिन, अब समस्या यह है कि ठगे गए पैसों से अक्सर ठग ऑनलाइन खरीदी या छोटे भुगतान कर देते हैं, जिससे निर्दोष व्यापारियों के खाते भी ब्लॉक हो रहे हैं.

साइबर सेल और क्राईम ब्रांच को रोजाना करीब 20 से 25 व्यापारी ऐसे मिल रहे हैं, जिनके खाते अचानक ब्लॉक हो गए हैं. कई बार व्यापारी को तब पता चलता है, जब वह किसी ग्राहक को पेमेंट भेजने या ऑनलाइन लेनदेन करने की कोशिश करता है. जांच में सामने आया है कि कई खातों को महज 500 से 1000 रुपए के ट्रांजेक्शन के चलते ब्लॉक किया गया है. साइबर सेल ने लोगों से अपील की है कि वे खाता चालू करवाने के नाम पर किसी भी व्यक्ति को पैसा न दें. अगर किसी दलाल या एजेंट द्वारा कमीशन मांगा जाए तो तुरंत पुलिस को सूचित करें. पुलिस का कहना है कि हर मामले की जांच पारदर्शी प्रक्रिया के तहत की जा रही है.

नेशनल हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत के बाद खाते सील
ठगी की शिकायत नेशनल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दर्ज होने के बाद संबंधित बैंक खातों को ब्लॉक कर दिया जाता है, ताकि ठग पैसा निकाल न सकें और फरियादी को उसका पैसा लौटाया जा सके. पर, अब ठगों की चालाकी से निर्दोष व्यापारी भी इस सिस्टम की चपेट में आ रहे हैं. कई मामलों में व्यापारी के खातों में व्यापार का लाखों रुपए का एक नंबर का पैसा फंस गया है.

दूसरे राज्यों में हुई ठगी से भी इंदौर के खाते ब्लॉक
कुछ मामलों में ठगी दूसरे राज्यों में हुई, लेकिन ठगों ने इंदौर के किसी व्यापारी के खाते में पैसा भेजा या उससे खरीदी की, जिसके चलते इंदौर के खाते भी ब्लॉक हो गए. ऐसे में व्यापारियों को कहा जा रहा है कि संबंधित राज्य की पुलिस ही खाते अनब्लॉक करेगी.

खाते चालू करवाने में भी शुरू हुई वसूली
व्यापारियों के बीच चर्चा है कि अब खातों को दोबारा चालू करवाने के नाम पर कुछ लोग कमीशन मांगने लगे हैं. बताया जा रहा है कि खाते में जितना पैसा होता है, उसके अनुपात में रकम लेकर खाते चालू करवाने की बात की जा रही है. हालांकि, पुलिस का कहना है कि ऐसा कोई वैधानिक तरीका नहीं है और जो लोग ठगों से जुड़े नहीं हैं, उनके खाते नियमों के तहत दोबारा चालू करवाए जा रहे हैं.

निर्दोष व्यापारियों को राहत दी जा रही है
एडीसीपी क्राइम राजेश दंडोतिया ने बताया कि साइबर ठगी के मामलों में जांच के दौरान जो खाते ब्लॉक हो जाते हैं, उनमें से कई ऐसे होते हैं, जिनका ठगों से कोई सीधा संबंध नहीं होता. ऐसे खातों की बैंक डिटेल और स्टेटमेंट जांची जाती है. अगर व्यापारी का कोई लिंक ठगों से नहीं है तो पुलिस बैंक को रिपोर्ट भेजकर खाता दोबारा चालू करवा रही है. हम चाहते हैं कि कोई भी निर्दोष व्यक्ति इस प्रक्रिया में परेशान न हो

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