कुआलालंपुर, 26 अक्टूबर (वार्ता) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 47वें आसियान शिखर सम्मेलन में भाग लेने को रविवार को कुआलालंपुर पहुंचे। इस यात्रा के साथ ही उन्होंने मलेशिया, जापान और दक्षिण कोरिया की एक महत्वपूर्ण राजनयिक यात्रा शुरू की। इस यात्रा का मकसद व्यापार संबंधों को नया रूप देना, प्रमुख गठबंधनों को मजबूत करना और एक वैश्विक नेता तथा शांतिदूत के रूप में अपनी छवि को चमकाना है।
श्री ट्रंप की छह दिवसीय यह यात्रा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका की नई भागीदारी की शुरुआत का प्रतीक है और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ एक बैठक के साथ समाप्त होगी।
यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक तनाव बढ़ रहा है क्योंकि दोनों देश टैरिफ बढ़ा रहे हैं और दुनिया में अपनी धाक जमाने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
श्री ट्रंप थाईलैंड और कंबोडिया के बीच एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर समारोह में शामिल होंगे। यह एक ऐसा समझौता है जिसके बारे में उनका दावा है कि उन्होंने स्वयं इसकी मध्यस्थता की थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति के मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ द्विपक्षीय वार्ता करने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में व्यापार, सुरक्षा और शांति निर्माण प्रयासों पर चर्चा करने वाले सत्रों में भाग लेने की उम्मीद है।
अमेरिकी राष्ट्रपति आसियान नेताओं के साथ एक रात्रिभोज में भी शामिल होंगे। श्री ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा, “मैं मलेशिया जा रहा हूं, जहां मैं उस महान शांति समझौते पर हस्ताक्षर करूंगा, जिसकी मध्यस्थता मैंने कंबोडिया और थाईलैंड के बीच गर्व से की थी। दुख की बात है कि थाईलैंड की राजमाता का हाल ही में निधन हो गया है। मैं थाईलैंड के महान लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं। जब हम वहां पहुंचेंगे तो मैं उनके प्रधानमंत्री से मिलूंगा। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में सभी की उपस्थिति को ध्यान में रखते हुए, हम आगमन पर तुरंत शांति समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।”
यह शांति समझौता कंबोडिया और थाईलैंड के नेताओं के बीच होगा और जिसके साक्षी ट्रंप होंगे। उम्मीद है कि यह समझौता दोनों दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को समाप्त करेगा।
श्री ट्रम्प का राजनयिक दौरा मुख्य रूप से आर्थिक नीति पर केंद्रित है। राष्ट्रपति से उम्मीद की जा रही है कि वे एशियाई सहयोगियों पर व्यापार असंतुलन, रक्षा खर्च और वैश्विक सुरक्षा पर सहयोग के लिए दबाव डालेंगे। साथ ही अमेरिकी उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नए समझौते भी करेंगे। लेकिन ट्रम्प की संरक्षणवादी व्यापार नीतियों और अप्रत्याशित विदेश नीति के कदमों ने पारंपरिक अमेरिकी सहयोगियों में बेचैनी पैदा कर दी है।
