अस्पताल में खांसी और बुखार के केस अधिक पहुंच रहे 

बड़वानी। जिले में लगातार बढ़ रही ठंड अब लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा असर डालने लगी है। पिछले कुछ दिनों से मौसम में तेज उतार-चढ़ाव और हवा में बढ़ते प्रदूषण के कारण सर्दी-जुकाम, एलर्जी, सूखी खांसी और वायरल फीवर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। मंगलवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में 707 मरीज पहुंचे, जिनमें करीब 27 से 30 प्रतिशत रोगी सर्दी-जुकाम और वायरल संक्रमण से पीडि़त थे।

मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को बड़वानी का अधिकतम तापमान 20.7 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 9 डिग्री दर्ज किया गया, जो इस सीजन का अब तक का सबसे कम तापमान है। पिछले सप्ताह तक जहां न्यूनतम तापमान 10 से 12 डिग्री के बीच था, वहीं अब इसमें उल्लेखनीय गिरावट आई है। जिला अस्पताल में सामान्य दिनों में ओपीडी संख्या 450 से 500 के बीच रहती है, लेकिन पिछले एक सप्ताह से यह आंकड़ा बढक़र 700 से 800 के बीच पहुंच गया है। ओपीडी में उपचार के लिए आने वालों में बच्चों और बुजुर्गों की संख्या सबसे अधिक है। डॉक्टरों के अनुसार, मौसम में अचानक गिरावट और प्रदूषण के बढ़ते स्तर से श्वसन संबंधी बीमारियां और वायरल संक्रमण तेजी से फैल रहे हैं। कई बच्चों को तेज बुखार, गले में खराश और खांसी की शिकायत के साथ अस्पताल लाया जा रहा है।

शहर में बढ़ी ठंड तापमान गिरा

गर्म मिजाज क्षेत्र में अब शीत ऋतु अहसास कराने लगी हैं। खासकर सुबह व रात्रि के समय वातावरण में ठंडक घुलने से दिन-रात का पारा गिरने लगा हैं। गिरते तापमान ने पूरे निमाड़-अंचल में सर्दी का एहसास बढ़ा दिया है। पिछले एक सप्ताह से अधिकतम और न्यूनतम तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। जिससे सुबह-शाम कड़ाके की सर्दी महसूस होने लगी है। शहर के बाजारों में गर्म कपड़ों की बिक्री बढऩे लगी है। गर्म कपड़ों के साथ अलाव ताप कर लोग सर्दी से राहत पाते नजर आ रहे हैं। हालांकि नगर पालिका स्तर पर अभी शहर में सार्वजनिक स्थानों, अस्पताल, बस स्टैंड आदि जगह अलाव की आधिकारिक शुरुआत नहीं हुई है।

यह बरते सावधानी

गर्म कपड़े पहनें, ठंडी चीजों का सेवन कम करें, सुबह उठते ही बाहर न निकलें, ठंडे फर्श पर नंगे पैर न चलें, गुनगुने पानी से स्नान करें, सुबह धूप निकलने के बाद ही मॉर्निंग वॉक वॉक पर जाएं।

वायरल बढ़ाए तेजी से रिकवर हो रहे मरीज

चिकित्सकों के अनुसार ठंड और प्रदूषण में बढ़ोतरी वायरल संक्रमण को बढ़ाती है, लेकिन इस मौसम में आम वायरस की रोगजनन क्षमता कम हो जाती है, जिससे मरीज 4.5 दिनों में ठीक हो रहे हैं। पहले जहां वायरल बुखार और सर्दी-खांसी को ठीक होने में 15.16 दिन लग जाते थे, अब मरीजों की रिकवरी तेजी से हो रही है। दमा और एलर्जी से पीडि़त मरीजों को विशेष सावधानी बरते।

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