इंदौर: शहर के प्रसिद्ध ऑटोमोबाइल कारोबारी और समाजसेवी प्रवेश अग्रवाल की मौत से शहर शोक में डूबा है. नर्मदा युवा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कांग्रेस से जुड़े अग्रवाल को अवैध खनन माफिया से कई बार धमकियां मिल चुकी थीं. वर्ष 2019 और 2020 में उन पर दो बार जानलेवा हमले भी हुए थे. अब उनकी असमय मौत से परिजन और परिचित सदमे में हैं, जबकि उनकी बेटी सौम्या की हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है.
प्रवेश अग्रवाल महिंद्रा शोरूम के मालिक और नर्मदा युवा सेना से जुड़े प्रमुख सामाजिक चेहरों में शामिल थे. उन्होंने प्रदेश में अवैध खनन के खिलाफ अभियान चलाया था, जिससे खनिज माफिया उनसे नाराज थे. सूत्रों के अनुसार, इंदौर में उन्हें कई बार फोन पर धमकियां दी गईं, जिसकी शिकायत उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों और साइबर सेल में भी की थी. बताया जा रहा है कि वर्ष 2019 और 2020 में उन पर दो बारजानलेवा हमले हो चुके थे, जिनमें वे बाल-बाल बचे थे. इन घटनाओं के बावजूद उन्होंने सामाजिक गतिविधियां नहीं छोड़ीं. राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे अग्रवाल को कांग्रेस आने वाले चुनाव में प्रत्याशी के रूप में उतारने की तैयारी कर रही थी, लेकिन इससे पहले यह दर्दनाक हादसा हो गया.
समाजसेवा में थे अग्रणी
प्रवेश अग्रवाल के करीबी बताते हैं कि प्रवेश अग्रवाल केवल उद्योग तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे समाजसेवा में भी अग्रणी थे. पिछले चार वर्षों में उन्होंने देवास जिले में निर्धन परिवारों की 500 कन्याओं की शादियां करवाईं. इसके साथ ही उन्होंने वृद्ध महिलाओं के लिए आश्रम का निर्माण करवाया और उनके पुनर्वास की जिम्मेदारी भी स्वयं ली थी. अग्रवाल के निधन के दो दिन बाद भी परिवार और शुभचिंतक सदमे से उबर नहीं पाए हैं. उनके निवास पर राजनेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों और शहर के कई सामाजिक संगठनों का लगातार आना-जाना लगा हुआ है. घटना में घायल बेटी सौम्या का इलाज बॉम्बे अस्पताल में जारी है. डॉक्टरों के मुताबिक, उसकी हालत में सुधार तो है, लेकिन होश में आते ही वह बेचैन हो जाती है. इस कारण चिकित्सक उसे इंजेक्शन देकर बेहोश रख रहे हैं. परिजन अब तक उसे पिता की मौत की जानकारी नहीं दे पाए हैं.
