दोषसिद्धि के लिए प्रत्यक्षदर्शी व फोरेंसिक साक्ष्यों की श्रृंखला होनी चाहिए पूरी

जबलपुर:हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस ए के सिंह की युगलपीठ ने अपने अहम आदेश में कहा है कि दोषसिद्धि के लिए प्रत्यक्षदर्शी व फोरेंसिक साक्ष्यों की श्रृंखला पूरी होनी चाहिये। श्रृंखला पूरी नहीं होने पर अभियुक्त को सजा से दंडित नहीं किया जा सकता है। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ हत्या के आरोप में दो अभियुक्तों को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा निरस्त करने के आदेश जारी किये है।

बालाघाट निवासी रिकेष उर्फ गुड्डू तथा दीपक उर्फ गोलू ने बालाघाट जिला न्यायालय के द्वारा हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा से दंडित किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अपील में कहा गया था कि लालबर्रा थानान्तर्गत 10 अक्टूबर 2019 को ग्राम दादिया स्थित एक छोटी नहर में एक शव नग्न अवस्था में मिला था। जिसकी शिनाख्त भेड़ाघाट निवासी सुभाष लधिया के रूप में हुई थी।

मृतक के चाचा रूपलाल ने पुलिस को बताया था कि वह 7.अक्टूबर 2019 को वह सुमित झारिया और सुभाष लढिया के साथ जबलपुर से लालबर्रा आए थे। ग्राम अमोली में उनकी मुलाकात दीपक उर्फ गोलू नरबोडे और उसके रिश्तेदार रोहित मेश्राम से हुई। जिन्होंने उन्हें अपनी मोटरसाइकिल से डडिया पोटियापाट मंदिर तक छोड़ा था। सुभाष और गोलू व रिकेष साथ अमेली में रूक गया था।
अपील में कहा गया था कि घटना स्थल से मिले तार व रस्सी में चमडी लगी हुई थी। जिसका डीएनए टेस्ट नहीं करवाया गया। इसके अलावा मृत्यु का कारण अत्यधिक रक्त की हानि और महत्वपूर्ण अंग यानी मस्तिष्क के फटने से हुई है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि रूपलाल के अलावा, अंतिम बार देखे जाने का कोई अन्य गवाह नहीं है। घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है। प्रत्यक्षदर्शी व फोरेंसिक साक्ष्यों की श्रृंखला भी पूरी नही होने के कारण अपीलकर्ताओं को दोषमुक्त किया जाता है।

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