शहर कार्यकारिणी के ऐलान में महामंत्री का रोड़ा

महाकौशल की डायरी

अविनाश दीक्षित

भारतीय जनता पार्टी ग्रामीण की कार्यकारिणी तो घोषित हो गई, उस सूची में सांसद आशीष दुबे का वर्चस्व भी दिख गया लेकिन अब शहर कार्यकारिणी के ऐलान को लेकर सिर्फ तारीख पर तारीख ही मिलती दिख रही है जिसने पार्टी में अलग-अलग पदों की चाह रखने वाले भाजपा नेताओं की बैचैनी बढ़ा दी है। इसी बीच संगठन के अंदरूनी खबरियों के माध्यम से जो जानकारी निकलकर सामने आ रही है वो काफी चौंकाने वाली है।

खबर है कि भाजपा शहर कार्यकारिणी के सभी नामों पर तो सहमति बन चुकी है लेकिन महामंत्री के पद पर सहमति नहीं बन पा रही है, ऐसे में जब तक महामंत्री के नाम पर सहमति नहीं बनेगी तब तक भाजपा शहर की कार्यकारिणी का ऐलान नहीं होगा। भाजपा जिलाध्यक्ष रत्नेश सोनकर ने भी अपने चहेतों के नाम भोपाल स्तर पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को सौंप दिए हैं लेकिन अंतिम मुहर किसके नाम पर लगती है ये तो आने वाली सूची में ही पता चलेगा।

उधर 30 अक्टूबर से 1 नवंबर तक जबलपुर स्थित संघ के मुख्यालय केशव कुटी में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की कार्यकारी मंडल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत स्वयं उपस्थित रहेंगे। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के खेमे में ये भी चर्चा है कि भाजपा की शहर कार्यकारिणी में आरएसएस में सक्रिय पदाधिकारियों के नामों पर भी अंतिम सूची में मुहर लग सकती है, जो कि इस बैठक के बाद होगा। मतलब साफ है कि आरएसएस की इस तीन दिन की बैठक के बाद ही भाजपा द्वारा शहर कार्यकारिणी का ऐलान किया जाएगा।

2 बार जारी हुए नोटिस फिर भी नींद नहीं खुली

जबलपुर स्मार्ट सिटी कार्यालय के एक ऐसा कारनामा सामने आया जिसने सभी को चौंका दिया है। पहले शासकीय दस्तावेजों को नष्ट कराने के आरोपों में और फिर अब स्मार्ट सिटी के कर्मचारियों के भविष्य निधि के रुपए भविष्य निधि संगठन क्षेत्रीय कार्यालय में जमा नहीं करने के मामले में सुर्खियों में आ गया है। इतना ही नहीं करीब 68 साल उम्र के बुजुर्ग कर्मचारी से भी कार्यालय में काम लिया गया और उसकी पीएफ की राशि को भविष्य निधि कार्यालय में जमा नहीं किया गया, जबकि 65 साल की उम्र में उनका रिटायरमेंट था। मामला जब उजागर हुआ तो आला अधिकारी सकते में आ गए।

अब देखना होगा कि कार्रवाई की गाज किसके ऊपर और कब गिरती है। लिहाजा मामला संज्ञान में आने के बाद भविष्य निधि संगठन क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारियों ने स्मार्ट सिटी कार्यालय के जिम्मेदारों को चेतावनी देते हुए 2 बार नोटिस भी जारी कर दिया और सख्त कार्रवाई करने की बात तक कह दी। स्मार्ट सिटी के संविदा कर्मचारियों का कहना है कि 2016 से लेकर अभी तक करीब 22 कर्मचारियों का पीएफ के रुपए भविष्य निधि कार्यालय में जमा नहीं किए गए हैं। कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त है और वे कह रहे हैं कि भविष्य निधि को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए थे लेकिन स्मार्ट सिटी कार्यालय प्रबंधन इस लाभ से वंचित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है।

बिना अर्हताओं वालों को कर दी गई नियुक्ति

नानाजी देशमुख वेटरनरी विश्वविद्यालय के प्रबंध मंडल में उद्योग प्रतिनिधि की जगह पूर्व डीन और गोसंवर्धन बोर्ड के अधिकारी को सदस्य बनाया गया तो मामले ने ऐसा तूल पकड़ा कि शिकायत राजभवन तक हो गई। इतना ही नहीं शासकीय कॉलेज की प्रिंसिपल की नियुक्ति भी संदेह के कटघरे में खड़ी हो गई क्योंकि मंडल में यहां महिला सामाजिक कार्यकर्ता की नियुक्ति की जानी थी। जानकारों ने स्पष्ट कहा कि विशेष व्यक्ति को उपकृत करने के चक्कर में शासन के नियम सारे दरकिनार कर दिए गए। पूरा मामला नानाजी देशमुख वेटरनरी विश्वविद्यालय के प्रबंध मंडल में 3 सदस्यों की नियुक्ति का है जहां आवश्यक अर्हताओं का पालन प्रबंधन द्वारा नहीं किया गया और अब कार्रवाई की गेंद राजभवन के पाले जा चुकी है।

खबर तो ये भी है कि सरकार के आला अधिकारियों को भी नियम तोड़कर नियुक्ति करने वालों की शिकायत की गई है। विदित हो कि 10 सितंबर को राजभवन से नानाजी देशमुख वेटरनरी विश्वविद्यालय जबलपुर के प्रबंध मंडल के लिए तीन सदस्यों की नियुक्ति के आदेश जारी किए गए थे। फिर विवि के अधिनियम के तहत राज्यपाल के विशेषाधिकार से यह नियुक्तियां की गई। जानकारों का खुले मंच से सार्वजनिक बयान जो जारी हुआ उससे साफ था कि जो वैज्ञानिक नहीं है वह मंडल में सदस्य बनने लायक नहीं है।

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