सतना : गुरुवार की सुबह जिले में उस वक्त एक हृदय विदाकर घटना सामने आई जब एक युवक चिकित्सक असमय काल के गाल में समा गए. अनियंत्रित कार के नदी में गिरने के बाद चिकित्सक को बाहर निकाल कर उपचार के लिए भेजा गया. लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई. इस घटना के चलते एक ओर जहां परिजन सुध-बुध खो बैठे वहीं दूसरी ओर व्यवस्थागत खामी पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे.
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के उचेहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ डॉ. शशांक सेठिया गुरुवार की सुबह अपने घर से कार में सवार होकर सतना की ओर जाने के लिए निकले. बताया गया कि जैसे ही उनकी कार बरुआ नदी पर बने पुराने पुल पर पहुंचे, वैसे कार अचानक अनियंत्रित हो गई. देखते ही देखते कार सीधे नदी में जा गिरी. इस दौरान वहां पर मौजूद कुछ लोगों ने घटना होती देखा शोर मचाया और पुलिस को सूचना दी.
इसी कड़ी में स्थानीय रहवासी काशीदीन मल्लाह, एएसआई एस एन उपाध्याय और प्रधान आरक्षक रामकरन प्रजापति फौरन नदी में कूद गए. अपनी जान की परवाह किए बिना इन लोगों ने कार को किसी तरह खंीच कर किनारे लगाया गया. जिसके बाद उसमें फंसे डॉ. शशांक को बाहर निकालते हुए उपचार के लिए भेजा गया. उचेहरा सीएचसी ले जाए जाने पर प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें आनन-फानन में जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया. लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में ही डॉ. शशांक ने दम तोड़ दिया. इस घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों के बीच कोहराम मच गया. सुध बुध खो बैठे माता पिता को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उनके कलेजे का टुकड़ा अब इस दुनियां में नहीं रहा.
पिता ने भेंट की थी कार
उचेहरा के वार्ड क्र. 8 के निवासी डॉ. शशांक पिछले लगभग एक साल से उचेहरा स्थित सीएचसी में अपनी सेवाएं दे रहे थे. डॉ. शशांक महज 28 वर्ष के थे और अब तक उनका विवाह भी नहीं हुआ था. वे सेवा निवृत्त शिक्षक अरुण गुप्ता के सबसे छोटे पुत्र थे. बताया गया कि इस वर्ष दिवाली से पहले ही पिता द्वारा डॉ. शशांक को नई चमचमाती कार भेंट की गई थी.
व्यवस्थागत खामी पर सवाल
स्थानीय रहवासियों ने बताया कि जिस बरुआ नदी पर बने पुराने पुल पर डॉ. शशांक की कार अचान अनियंत्रित होकर नदी में जा गिरी. वहां पर न सिर्फ बेतरतीब गड्ढे मौजूद हैं बल्कि जिस छोर पर यह हादसा हुआ वहां पुल की सुरक्षा दीवार तक नहीं है. जिसके चलते बेतरतीब गड्ढों से बचने की कवायद में लोगों को पुल पर अपनी स्थिति का एहसास ही नहीं हो पाता. स्थानीय लोगों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए बताया कि यदि पुराने पुल को दुरुस्त कर दिया गया होता अथवा उक्त रास्ते को पुरी तरह से बंद कर दिया होता तो एक युवा चिकित्सक की इस तरह जान नहीं जाती.
