महू: एक ओर जहां देश में परंपराओं का निर्वहन खत्म होता जा रहा है, वहीं महू शहर में आज भी इन परंपराओं को बड़े उत्साह से निभाया जाता है. जहां पांच दिनों तक चलने वाले दीपोत्सव में दिपावली को मुख्य माना जाता है और साल भर तक उत्साह के साथ लोग इस त्योहार की प्रतिक्षा करते हैं, परंतु महू एक ऐसी जगह है, जहां लोग दीवाली से ज्यादा दीवाली के दूसरे दिन मनाए जाने वाले धोक पड़वा का इंतजार करते हैं.
महू में मनाई जाने वाली धोक पड़वा पूरे भारत वर्ष में प्रसिद्ध है. महू के लोग चाहे वो विदेश में क्यों ना हों, इस दिन यहां पहुंचते हैं. इस पर्व के दिन लोग घर-घर जाकर बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं और बराबरी के लोग गले मिलकर एक-दूसरे को पर्व की बधाई और शुभकामनाएं देते हैं. लोग एक दूसरे का मुंह मीठा कराकर और भेंट देकर पर्व को उत्साह से मनाते हैं.
सामूहिक रंगोली प्रतियोगिता हुई आयोजित
इस दिन पूरे शहर में सामूहिक रंगोली प्रतिस्पर्धा का भी आयोजन किया जाता है. जिसमें सामाजिक संस्थाएं भी भाग लेती हैं और चयनित कलाकारों को पुरस्कृत भी किया जाता है. जुगनू जादवसिंह धनावत ने बताया कि इस बार भी महू की ऐतिहासिक परंपरा धोक पड़वा पर रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया और इसमें भाग लेने वाले कलाकारों को पुरस्कृत किया गया.
धोकपड़वा पर्व से राजनीति भी अछूती नहीं
महू में मनाए जाने वाले धोकपड़वा पर्व से राजनीति भी अछूती नहीं है. सभी राजनीतिक दलों के लोग और जनप्रतिनिधि घर-घर पहुंचकर आशीर्वाद लेते हैं और बधाई देते हैं. क्षेत्रीय विधायक और केबिनेट मंत्री उषा ठाकुर भी महू पहुंची और लोगों से आशीर्वाद लिया. वहीं, नगर भ्रमण में मुख्य रूप से सेवादल प्रदेश अध्यक्ष योगेश यादव, जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े, वरिष्ठ कांग्रेस नेता कैलाशदत्त पांडे, जिला पंचायत सदस्य कन्हैयालाल ठाकुर, मुजीब कुरैशी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने उपस्थित होकर दीप उत्सव की शुभकामनाएं दीं. स्थानीय लोगों ने जगह-जगह ढोल-धमाकों के साथ आत्मीय स्वागत किया.
