औंधे मुंह गिरी वायु गुणवत्ता: फुलझड़ी, फ़टाको ने बिगाड़ा खेल

जबलपुर: दिवाली का पर्व धूमधाम के साथ संपन्न हो गया है। लेकिन इस त्यौहार में जमकर चली फुलझड़ी, बम और फटाकों ने शहर की आवोहवा को हिला कर रख दिया है। बात करें अगर पिछले 3 वर्षों की तो इस वर्ष दिवाली के दिन शहर का एयूआई सर्वाधिक स्तर 376 पहुंच गया था। गत तीन वर्षों में ये आंकड़ा 2022 में 240, 2023 में 160 और 2024 में 340 था। हालाकि, बुधवार की सुबह ये आंकड़ा 160 से 170 के बीच आया, लेकिन शाम होते ही जब फिर से आतिशबाजी की धूम बढ़ी, ये इंडेक्स फिर तेजी से बढ़ गया।

वही चिकित्सकों की ओर से लोगों को सलाह दी गयी है कि सुबह की वॉकिंग से फलहाल परहेज करना चाहिए साथ ही घर से कम निकलना चाहिए। जानकार बताते है कि इस वक्त हवा में सल्फर डाइऑक्साइ के साथ साथ कार्बन मोनो ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड मौजूद है। नवभारत भी आम जनों से ये अपील करता है की बाहर निकलते वक्त मास्क जरूर पहनें, आंख और चेहरा ढकें, यदि मरीज हैं तो डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं का नियमित सेवन करें, ताकि फेफड़ों और सांस की परेशानी न बढ़े।
यहां लगी थीं मशीनें
दिवाली पर शहर की वायु प्रदूषण की स्थिति पर नजर रखने के लिए मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने विशेष तैयारी थी। इस दौरान वायु और ध्वनि प्रदूषण की निगरानी के लिए शहर में 6 स्थानों पर मशीनें लगाई गई हैं। इन स्थानों पर 24 घंटे वायु प्रदूषण के आंकड़ों की मॉनिटरिंग की जा रही है। इनमें, विजय नगर चौक, मढ़ाताल, मौसम विभाग, रामपुर, आधारताल एवं उच्च न्यायालय चौक शामिल है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जबलपुर कार्यालय के अधिकारियों ने 19 नवंबर तक वायु प्रदूषण के आंकड़ों की रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय भेजी थी, अब इसके अलावा दिवाली के दिन और बाद के प्रदूषण के आंकड़े भी एकत्र किए जाएंगे।
प्रदूषण की रोकथाम के लिए करें ये उपाय
जानकारों कि माने तो प्रदूषण की रोकथाम के लिए आम जनों को वाहनों का इस्तेमाल कम करना चाहिए। वही सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना चाहिए एवं कूड़ा और कचरे को नहीं जलाना चाहिए। इसके अलावा वायु प्रदूषण के कारण शहर में सांस की बीमारियों, हृदय संबंधी समस्याओं और त्वचा की एलर्जी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को मास्क लगाने और सुबह के समय घूमने से बचने की सलाह दे रहे हैं।
नहीं मिले परिणाम
सूत्रों की मानें तो नगर निगम ने वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए पिछले तीन साल में लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस राशि से सडक़ सफाई के लिए स्वीपिंग मशीनें, हाई-प्रेशर जेटिंग मशीन, मिनी जेटिंग व वाटर स्प्रे मशीन, गार्बेज कम्पेक्टर, और एनिमल एलपीजी इन्सिनरेटर प्लांट खरीदे गए। इसके बावजूद धूल नियंत्रण और हवा की गुणवत्ता सुधारने में अपेक्षित परिणाम नहीं मिले हैं।

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