ख्वाजा खानून के उर्स में आयोजित हुआ राष्ट्रीय सेमिनार

ग्वालियर। सूफी संतों की शिक्षाओं ने समाज में जाति पांति ऊंच नीच छोटा बड़ा गरीब अमीर के भेद को मिटाकर समरसता और आपसी प्रेम और सदभाव क़ायम करने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। आवश्यकता है कि हम सूफी संतों के बताए मार्ग पर चलते हुए शोषित पीड़ित मानवता की सेवा करें। उक्त उदगार हजरत ख्वाजा खानून के 507 वें उर्स के चौथे दिन आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में अध्यक्षता कर रहे हजरत ख्वाजा राशिद खानूनी ने व्यक्त किए।

इस अवसर पर फ्रांस से पधारी ख्वाजा खानून साहब की मुरीद रिसर्च स्कॉलर प्रोफेसर नलिनी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। सूफी संतों की शिक्षाओं का राष्ट्रीय एकता में योगदान विषय पर आयोजित सेमीनार में साकिब खानूनी, फारुख मुगल बेग, शरीफ कुर्रेशी, पत्रकार नईम कुर्रेशी, परमानन्द शर्मा, डॉ तसलीम अहमद खां, मौलाना नौशाद ने सूफीज्म पर अपने विचार रखे। प्रारम्भ में उर्स संयोजक राम बाबू कटारे ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की। अतिथियों का स्वागत नायब सज्जादानशीन डॉ एजाज खानूनी, मुआज खानूनी, खुसरो खानूनी ने किया। ख्वाजा राशिद खानूनी ने सभी के लिए विशेष दुआ की। प्रबन्ध समिति की ओर से सभी अतिथियों का सम्मान पुष्पहारों से एवं चादर, स्मृति चिन्ह और प्रसाद भेंट कर किया। सेमीनार का संचालन राम बाबू कटारे ने किया। आभार प्रदर्शन डॉ एजाज खानूनी ने किया ।

ख्वाजा साहब के उर्स में आज चांद रात में मेहफिले कब्बाली के अन्तर्गत दोपहर दो बजे से कब्बालियां हुईं।

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