पारेषण सुधारों से 200 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का होगा विकास

नयी दिल्ली, 22 अक्टूबर (वार्ता) बिजली पारेषण व्यवस्था के मोर्चे पर सुधार की 2.4 लाख करोड़ रुपये की योजना के माध्यम से सरकार देश में पांच लाख मेगावाट बिजली के लिए मजबूत पारेषण नेटवर्क की कल्पना कर रही है।
पारेषण प्रणाली में सुधार के जरिये नवीकरणीय ऊर्जा-समृद्ध राज्यों को बिजली की बड़ी मांग वाली जगहों से जोड़ा जायेगा। नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने बुधवार को एक विज्ञप्ति में कहा कि सरकार हरित ऊर्जा गलियारों और राजस्थान, गुजरात और लद्दाख से नयी उच्च क्षमता वाली पारेषण लाइनों के माध्यम से पारेषण बुनियादी ढांचे में निवेश को प्राथमिकता दे रही है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने 2030 तक पांच लाख मेगावाट स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन क्षमता का लक्ष्य रखा है। मंत्रालय का कहना है कि ट्रांसमिशन में सुधार की ये परियोजनाएं कई वर्षाें में पूरी होंगी, लेकिन एक बार चालू होने पर ये दो लाख मेगावाट से अधिक नयी नवीकरणीय क्षमता जोड़ेंगी। इस प्रकार वर्तमान चरण अस्थायी है – एक संक्रमणकालीन अंतराल है, न कि एक संरचनात्मक सीमा है।
मंत्रालय के अनुसार, साल 2030 स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को कार्यनीति स्तर पर स्थायित्व के साथ आगे बढ़ाने के लिए ग्रिड, वित्तीय प्रणालियों और बाजार डिजाइन के साथ नवीकरणीय ऊर्जा का समन्वयन किया जा रहा है। विज्ञप्ति के अनुसार, सरकार ने पहले ही एचवीडीसी कॉरिडोर बनाने और अंतर-क्षेत्रीय पारेषण क्षमता को वर्तमान 120 गीगावाट (1.2 लाख मेगावाट) से बढ़ाकर साल 2027 तक 1.43 लाख मेगावाट तथा 2032 तक 1.68 लाख मेगावाट करने की योजना बना ली है।
मंत्रालय ने कहा है कि ये सुधार पारेषण उपयोग को अनुकूलित करने और अटकी हुई नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की दिशा में एक निर्णायक कदम हैं, जो इस सेक्टर की प्रमुख कार्यान्वयन चुनौतियों में से एक का प्रत्यक्ष समाधान करते हैं।

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