
नई दिल्ली, 21 अक्टूबर 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की 121 सीटों के लिए एनडीए और महागठबंधन दोनों ने टिकटों का वितरण अपने-अपने वोट बैंक और सामाजिक समीकरणों को साधने के उद्देश्य से किया है। एनडीए ने अपनी लिस्ट में 48 सवर्णों को टिकट दिया है, जबकि महागठबंधन ने 23 सवर्ण प्रत्याशी उतारे हैं। सवर्णों में, एनडीए ने सर्वाधिक 21 टिकट राजपूतों को दिए हैं, जबकि महागठबंधन ने 11 भूमिहारों पर अपना मुख्य दाँव खेला है।
महागठबंधन ने पहले चरण में मुस्लिम-यादव (M-Y) समीकरण पर बड़ा भरोसा जताया है। आरजेडी ने 51 सीटों में से 34 यादवों और 6 मुस्लिमों को टिकट दिया है, जिससे महागठबंधन के कुल मुस्लिम प्रत्याशियों की संख्या 8 हो गई है। वहीं, एनडीए की पहले चरण की सूची में कोई भी मुस्लिम प्रत्याशी नहीं है। इसके अलावा, एनडीए ने केवल 8 यादवों को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने 2 यादव प्रत्याशी उतारे हैं।
कांग्रेस पार्टी बिहार में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कवायद में जुटी है, जिसके लिए उसने अपने परंपरागत वोट बैंक (सवर्ण, मुस्लिम, दलित) के साथ-साथ पिछड़ा-अति पिछड़ा वर्ग को भी तरजीह दी है। उधर, बिहार में पहली बार चुनाव लड़ रही जन सुराज ने अपने पहले चरण के उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा 20 टिकट भूमिहारों को देकर सवर्णों पर बड़ा दाँव खेला है। इन आंकड़ों से साफ है कि 6 नवंबर को होने वाले मतदान में जातिगत समीकरणों की चाल ही निर्णायक साबित होगी।
