ईरान के यूरेनियम भंडार को अमेरिकी-इजराइली हवाई हमलों से कोई नुकसान नहीं

विएना, 20 अक्टूबर (वार्ता) संयुक्त राष्ट्र परमाणु निगरानी संस्था-अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने कहा है कि जून में हुए इजराइली और अमेरिकी हवाई हमलों से ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के विशाल भंडार को अधिक नुकसान नहीं पहुंचा है। उन्होंने यह भी बताया कि उसका लगभग पूरा भंडार अभी भी ईरान के कब्जे में है।

श्री ग्रॉसी ने स्विस दैनिक न्यू जुर्चर जितुंग को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “हमारी जानकारी में यूरेनियम का अधिकांश हिस्सा अभी भी इस्फहान और फोर्डो स्थित परमाणु संयंत्रों में और आंशिक रूप से नतांज में मौजूद है। हालांकि वहां स्थित संयंत्रों पर बमबारी की गई थी। वे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं और आंशिक रूप से भूमिगत हैं। यहां तक पहुंचने के लिए ईरान का पूर्ण सहयोग आवश्यक होगा। यह तभी संभव होगा जब ईरान इसमें राष्ट्रीय हित देखेगा।”

तेहरान और यरुशलम के बीच 12 दिनों की अवधि तक चले युद्ध के दौरान इजराइली रक्षा बलों (आईडीएफ) ने अपने एफ-15, एफ-16 और एफ-35 लड़ाकू विमानों के बेड़े का इस्तेमाल करते हुए उन्नत लंबी दूरी की निर्देशित मिसाइलों, ड्रोन और यूएवी का इस्तेमाल करके अराक, तेहरान, करज और यहां तक कि ईरानी सेना की हथियार विकास एजेंसी-डिफेंसिव इनोवेशन एंड रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (एसपीएनडी) के मुख्यालय पर भी इस्लामी गणराज्य के कई परमाणु प्रतिष्ठानों पर बमबारी की।

बाद में अमेरिकी वायु सेना भी युद्ध के मोर्चे पर शामिल हो गई और उसने अपने विनाशकारी जीबीयू-57 श्रृंखला के ‘बंकर बस्टर’ बमों और टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों से ईरान के तीन प्रमुख परमाणु स्थलों-फोर्डो, इस्फहान और नतांज पर विनाशकारी हमले किए।

हालांकि इजराइली और अमेरिकी हमलों से इन सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा और कई छोटी सुविधाएं बर्बाद हो गईं। लेकिन बड़ी सुविधाएं खासकर प्रमुख सुविधाएं नुकसान से बच गईं और उनके संवर्धित यूरेनियम भंडार जमीन के इतने नीचे थे कि वे अमेरिकी बंकर बस्टर बमों के हमलों को झेल गए।

हालांकि तेहरान ने परमाणु हथियार बनाने की बात से इनकार किया है। लेकिन संयुक्त राष्ट्र परमाणु निगरानी संस्था के प्रमुख ने कहा कि उसकी संभावित क्षमताओं को लेकर चिंताएं ‘पूरी तरह से दूर नहीं हुई हैं।’ खासकर 2015 के परमाणु समझौते के रद्द होने, तेहरान पर सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को फिर से लागू करने और इस्लामिक गणराज्य के अब समझौते की शर्तों से बंधे न होने के कारण वह यूरेनियम को हथियार स्तर तक संवर्धित करने के अपने लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए स्वतंत्र है।

श्री ग्रॉसी ने कूटनीति के नवीनीकरण का आग्रह किया और कहा कि उन्हें पिछले सप्ताह इजराइली प्रतिनिधि सभा नेसेट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा कूटनीति को खुला रखने के लिए दिए गए बयान ‘बहुत उत्साहजनक’ लगे। उन्होंने कहा, “नेसेट में ही उन्होंने ईरान का जिक्र किया था और घोषणा की थी कि वे कूटनीतिक समाधान में विश्वास रखते हैं-यह इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के केवल चार महीने बाद हुआ है।” उन्होंने आगे कहा कि जून में जो हुआ उसे बदला नहीं जा सकता। लेकिन एक साथ एक मेज पर बैठने से हम बमबारी और हमलों के एक और दौर के खतरे से बच सकते हैं।

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