इंदौर: भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत इंदौर जिले में नवीन गर्भनिरोधक साधन इंप्लांट का पहला सफल प्रयोग शासकीय प्रकाश चंद सेठी सिविल अस्पताल में किया गया. यह प्रयोग डॉ. सारा खान और उनकी नर्सिंग टीम द्वारा किया, जो परिवार कल्याण कार्यक्रम की दिशा में जिले की एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है.
जिले में हाल ही में इंप्लांट और अंतरा एससी जैसे नवीन गर्भनिरोधक साधनों के उपयोग के लिए अभिमुखीकरण प्रशिक्षण आयोजित किया था.
यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मध्यप्रदेश एवं जिला स्वास्थ्य समिति इंदौर द्वारा यूएनएफपीए के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें शहरी क्षेत्र के ब्लॉक अधिकारियों और चिकित्सा अधिकारियों ने भाग लिया. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने गर्भनिरोधक इंप्लांट की सफलता पर अस्पताल प्रबंधक, चिकित्सा अधिकारी और नर्सिंग टीम को बधाई दी. उन्होंने कहा कि यह पहल महिलाओं को दीर्घकालिक और विश्वसनीय गर्भनिरोधक विकल्प प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी. जिलाधीश इंदौर के मार्गदर्शन में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग लगातार स्वास्थ्य सेवाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रयासरत है.
क्या होता है इंप्लांट…
इंप्लांट एक छोटा, लचीला रॉड होता है, जिसकी लंबाई लगभग चार सेंटीमीटर होती है. इसे प्रशिक्षित प्रदाता द्वारा महिला की ऊपरी बांह की त्वचा के नीचे लगाया जाता है. यह विधि तीन वर्ष तक गर्भधारण से सुरक्षा प्रदान करती है और महिला चाहे तो इसे निकलवाकर तुरंत गर्भधारण भी कर सकती है. यह सुरक्षित, प्रभावी और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए भी उपयुक्त गर्भनिरोधक विधि मानी जाती है.
