महाकौशल की डायरी
अविनाश दीक्षित
लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा शुरू किए गए वोट चोर गद्दी छोड़ हस्ताक्षर अभियान को लेकर कांग्रेसी शहर के चौराहों, तिराहों तक तो पहुंचे लेकिन घर-घर और गली-गली पहुंचने के राहुल के फरमान पर पलीता लगाते भी नजर आए। जिसका परिणाम था कि जिला कांग्रेस कमेटी के पास अभी तक सिर्फ 25 हजार ही हस्ताक्षर पहुंच पाए हैं। जबकि नगर कांग्रेस कमेटी द्वारा 1 लाख हस्ताक्षर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
जिला कांग्रेस कमेटी को इसकी रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कमेटी को 17 अक्टूबर को सौंपनी है। उधर उत्तर मध्य विधानसभा में अभियान ठप्प साबित दिखाई दिया । पश्चिम, कैंट विधानसभा में कुछ-कुछ जगहों पर अभियान की सक्रियता देखी गई वहीं पूर्व विधानसभा में अभियान की ठीक ढंग से सक्रियता देखी गई क्योंकि वहां कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया और उनकी टीम जुटी रही। चर्चाएं हैं कि बैठकों, चौराहों, तिराहों में कांग्रेसी के नामी चेहरों ने फोटो सेशन कराकर सुर्खियां तो बटोर लीं लेकिन हकीकत में हस्ताक्षर अभियान को सफल नहीं बना पाए।
57 साल में जो आज तक नहीं हुआ वो अब हो रहा
रानीदुर्गावती विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के 57 साल के इतिहास में आज तक जो नहीं हुआ वो इस बार हुआ.. हुआ ये कि कर्मचारी संघ के अध्यक्ष को हटाने के लिए कर्मचारियों का ग्रुप लामबंद हो गया.. बस फिर क्या था अध्यक्ष को हटाने की आवाज को प्रतिदिन बुलंद किया जाने लगा। मामला 20 सूत्रीय मांगों को लेकर कर्मचारी संघ द्वारा सितंबर माह में किए जा रहे आंदोलन से जुड़ा था, जिसके बीच कर्मचारी संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र पटेल ने विवि प्रशासन को पत्र सौंप हड़ताल को बीच में ही स्थगित करने का ऐलान कर दिया।
बस फिर क्या था संघ के अन्य कर्मचारियों का कहना था कि अध्यक्ष ने उनसे रायशुमारी नहीं की जिसके बाद कर्मचारियों ने अध्यक्ष का विरोध करना शुरू कर दिया था। अभी हालात ये हैं कि कर्मचारियों ने संघ संविधान का हवाला देते हुए अध्यक्ष, महासचिव और कुलगुरू को सौंपे पत्र में अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव के लिए आम सभा बुलाने की मांग कर डाली है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें अब बिल्कुल विश्वास नहीं है कि वीरेंद्र सिंह पटेल अध्यक्ष के रहते हुए उनका कोई काम हो पाएगा। वहीं दूसरी तरफ विश्वविद्यालय में अब यह चर्चा जोरों पर है कि अविश्वास प्रस्ताव की आमसभा में अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह पटेल अध्यक्ष पद पर बने रहने के लिए क्या जरूरी 25 प्रतिशत कर्मचारियों को मनाने में वह सफल हो पाएंगे। जानकारों का कहना है कि ये काम अध्यक्ष के लिए अब बिल्कुल आसान होने वाला नहीं है और उन्हें अब अपनी कुर्सी से हाथ धोना पड़ सकती है।
गरीबों के अनाज में निकलीं इल्ली-घुन….
जबलपुर में मोतीलाल नेहरू वार्ड की दो राशन दुकान प्रशासन द्वारा सील तो कर दी गई, जांच में दोषी राशन दुकान संचालक ही निकले क्योंकि वे दोनों जून माह का खाद्यान्न सितंबर में बांट रहे थे लेकिन जांच के मुख्य सवाल अब भी बरकरार हैं। एक तरफ दुकान संचालक अपने बयान पर अडिग हैं कि उनके गोदाम में ये इल्ली, घुन लगा गेंहूं, चावल 27 सितंबर 2025 को ही पहुंचा है। दूसरी ओर प्रशासन उनकी बात को ख़ारिज कर रहा है।
अन्य राशन दुकानदारों के बीच चर्चाएं हैं कि प्रशासन अपनी खामी को छिपाने दुकान संचालकों पर कार्रवाई कर रही है, जबकि ओपन कैंप तथा अन्य गोदामों में रखे अनाज की क्या दुर्दशा है यह अफसरों को नजर नहीं आ रहा है। फिलहाल गोदामों में सड़ा अनाज कैसे पहुंचा इसकी जांच करने कलेक्टर ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं लेकिन ये जांच पूरी होने में कितने दिन लगेंगे इसकी जवाबदेही अभी फिलहाल कोई लेते नजर नहीं आ रहा है। जिले में अभी जो हालात देखे जा रहे हैं उससे तो साफ है कि मैदान में राशन दुकान संचालकों और जिला प्रशासन एक बार फिर आमने-सामने आ सकते हैं।
