
भोपाल। पुलिस ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के लगभग 25 कर्मचारियों के फर्जी मेड़िकल बिल के नाम पर हुई धोखाधड़ी की जांच की जा रही है. इस पुराने मामले में डीएसपी ओपी मिश्रा ने कार्रवाई के लिए मंगलवार को प्रतिवेदन भी सौंपा था. प्रतिवेदन के आधार पर जहांगीराबाद पुलिस ने कूट रचित दस्तावेज और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है. विभागीय जानकारी के अनुसार सभी आरोपियों के बैंक खातों को भी फ्रीज कर दिया गया है, जल्द ही मामले में चालान भी पेश किया जाएगा. बता दें कि मामले में घिरे आरोपियों को फरवरी महीने में सस्पेंड कर दिया गया था और पुलिस तहकीकात जारी है.
जहांगीराबाद थाना पुलिस के अनुसार मामले में पीएचक्यू विभाग के मेडिकल शाखा के स्टाफ के तौर पर पदस्थ प्रभारी एएसआई हर्ष वानखेड़े, कैशियर- सूबेदार नीरज कुमार और सहायक स्टाफ- हेड कॉन्स्टेबल राजपाल ठाकुर आरोपी बनाए गए हैं. आरोपियों को जेल भी भेजा जा चुका है. आरोप है कि साल 2023 से जुलाई 2025 के बीच आरोपी पुलिसकर्मियों ने फर्जी मेडिकल बिल पास कराते हुए सरकारी राशि को अपने बैंक खातों में ट्रांसफर कराई था. मामला उजागर होने के बाद जहांगीराबाद थाने में शिकायत दर्ज कराई गई. तीनों कर्मचारियों पर लाखों रूपए की ठगी के आरोप है.
जानकारी के अनुसार पीटीआरआई के कर्मचारियों को जब लगातार नीरज कुमार और राजपाल ठाकुर की तरफ से किए गए फोन से यह जानकारी दी जाने लगी कि उनके खातों में पहुंचने वाली राशि मेडिकल शाखा की गलती से ट्रांसफर हुई है. आरोपी फोन पर ही कर्मचारियों को झांसे में लेते हुए ट्रांसफर की राशि अपने बैंक खातों में वापस करा लेते थे. पीटीआरआई के कर्मचारियों की आपसी बातचीत के दौरान मामले का खुलासा हुआ और वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की गई. जानकारी यह भी सामने आई कि पीएचक्यू के ट्रेजरी विभाग ने मेडिकल बिल को लेकर इस बीच एक साफ्टवेयर का उपयोग भी शुरू किया, जिसके बाद मामला स्पष्ट हुआ.
