जबलपुर: देश भर के 3 लाख से ज़्यादा रक्षा असैन्य कर्मचारियों ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की तत्काल अधिसूचना की मांग को लेकर राष्ट्रीय विरोध दिवस मनाया। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ), भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ , सीडीआरए के आह्वान पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में पूरे भारत में 400 से ज़्यादा रक्षा प्रतिष्ठानों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए।
आयुध निर्माणी खमरिया में सुबह द्वार में नारेबाजी की गई, एआईडीईएफ के संगठन मंत्री अर्नब दासगुप्ता ने कहा कि सरकार द्वारा मनमाने तरीके से आयुध कार्यखानों को निगम में परिवर्तित कर दिया है जो कि न्याय उचित नहीं है ,साथ ही देश के सुरक्षा पर भी सवालिया निशान लग गया है, आयुध निर्माणियां का निगमीकरण देश हित में नहीं है। वहीं लेबर यूनियन के अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह ,महामंत्री सुकेश दुबे ,कामगार यूनियन के अध्यक्ष राजेंद्र चढ़ारिया, एस टी / एस सी यूनियन के सीताराम सिलावट ने कहा कि वर्ष 2025 समाप्त होने जा रहा है.
लेकिन सरकार द्वारा अभी भी 8 वे वेतन आयोग का गठन नहीं किया गया है, निगमीकरण के बाद से अनुकम्पा नियुक्ति पूर्ण रूप से रुकी हुई है, पुराना पेंशन कर्मचारियों का अधिकार है लेकिन सरकार द्वारा एनपीएस और यूपीएस जैसे प्रस्ताव कर्मचारियों के साथ धोखा है । विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरेश कन्ना, हरीश चौबे, शिवेंद्र रजक, दिनेश नामदेव, संजीव सिंह , निर्भय पटेल , प्रभात रंजन ,संगम कुमार मौजूद रहे।
ये तीन मांगों पर आधारित रहा विरोध प्रदर्शन
जानकारी के अनुसार विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से 3 मांगों पर केंद्रित रहा जिसमें राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) के कर्मचारी पक्ष द्वारा प्रस्तावित संदर्भ की शर्तों (टीओआर) को शामिल करते हुए 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की अधिसूचना का तत्काल प्रकाशन करना, 1 जनवरी, 2004 को या उसके बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (सीसीएस पेंशन नियम, 1972/2021) की बहाली करना और रक्षा मंत्रालय द्वारा लगाए गए अवैध प्रतिबंध को हटाकर मृत रक्षा असैनिक कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करना शामिल हैं।
