एम्स में प्लाजमा चोरी के अबतक 6 आरोपी गिरफ्तार

भोपाल। एम्स अस्पताल भोपाल की ब्लड बैंक से चोरी गये एफएफपी प्लाज्मा की चोरी के मामले में बुधवार को पुलिस ने पर्दाफाश किया. थाना बागसेवनिया पुलिस ने मामले में अबतक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त जोन 2 गौतम सोलंकी ने बताया कि एम्स अस्पताल भोपाल की ब्लड बैंक से चोरी गए एफएफपी प्लाज्मा का बाजार मूल्य करीबन 12 लाख रुपये है. आरोपियों के पास से प्लाज्मा बेचकर मिली नगदी 8 लाख 57 हजार रुपए को जब्त किया गया है. पुलिस ने आरोपी लक्की पाठक, दीपक पाठक, अंकित केलकर और अमित जाटव से प्लाजमा चोरी की नगदी बरामद की है. पुलिस ने आरोपी करण चव्हाण और शाम बडगुजर के पास से कुल 1123 युनिट एफएफपी प्लाज्मा के पैकेट बरामद किए हैं.

गौतम सोलंकी ने बताया कि 29 सितंबर एम्स में प्लाजमा चोरी की घटना के संबंध में एफआईआर दर्ज कराई गई थी. 4 अक्टूब को इस अपराध के आरोपी अंकित केलकर, जो एम्स भोपाल की ब्लड बैंक का आउटसोर्स कर्मचारी था उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया. आरोपी से चोरी गये प्लाज्मा के संबध में पुलिस पूछताछ की गई, तो आरोपी ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर अपराध की घटना को अंजाम देने की बात को स्वीकार किया. उन्होंने बताय कि आरोपी अंकित केलकर, अमित जाटव और लक्की पाठक लाईव सेवर ब्लड बैंक से परिचित थे. आरोपी अंकित केलकर की कंपनी का 30 सितबंर को टेंडर खत्म हो रहा था. आरोपियों ने इस दौरान योजना बनाई और एम्स की ब्लड बैंक से प्लाज्मा चोरी की. 18 से 27 सितंबर के बीच 1150 एफएफपी प्लाज्मा के पैकेट चोरी सभी आरोपियों ने मिलकर की थी.

आरोपी लक्की पाठक और दीपक पाठक ने चोरी के प्लाजमा को नासिक के रहने वाले शाम बड़गूजर एवं औरंगाबाद के करन चव्हाण को 5800 रूपये प्रति लीटर के हिसाब से बेचा था. शाम बड़गूजर इन्दौर के के नंदानगर में थैलीसीमिया ब्लड बैंक और करण चव्हाण ने औरंगाबाद में सहयाद्री ब्लड बैंक के साथ ही सिरपुर महाराष्ट्र स्व मुकेश भाई पटेल ब्लड बैंक को प्लाज्मा बेंचने की फिराक में था. इससे पहले पुलिस उस तक पहुंच गई.

पुलिस ने बताया कि प्लाजमा का उपयोग जले हुऐ मरीजों के लिये एल्वोविन बनाकर उपयोग किया जाता है और फार्मा कंपनीयों द्वारा विभिन्न प्रकार की दवाईंया बनाने में उपयोग लिया जाता है. आरोपी लक्की पाठक 10 वीं पास है और उसका बड़ा भाई दीपक पाठक 12 वीं पास है, जिसने अलग ब्लड बैंक में नौकरी की है. आरोपियों ने पूछताझ में बताया कि इसी कारण से आरोपी दीपक पाठक के अलग- अलग राज्यों की ब्लड बैंकों से संपर्क थे. दीपक की पत्नी भी उसके साथ लाईव सेवर बैंक भोपाल में नौकरी करती थी, जिसने डीएमएलटी कोर्स कर रखा है. दीपक की पत्नी का इस प्रकरण में अभी तक नाम नहीं आया है. पुलिस ने बताया कि इस मामले में अभी कार्रवाई जारी है.

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