
इन्दौर. नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में शिक्षकों एवं अभिभावकों की सांझी जिम्मेदारी है जिसमें ज्ञान और कौशल के अतिरिक्त बाल व्यक्तित्व के नैसर्गिक एवं भावनात्मक पहलुओं का विकास महत्वपूर्ण है. अभिभावक सीखने- बढ़ने की प्रक्रिया के उत्प्रेरक बनें. हमें शिक्षकों एवं अभिभावकों की सहभागिता के साथ बच्चों का भविष्य का निर्माण करना है. साथ चलेंगे, साथ सीखेंगे और मिलकर बच्चों का भविष्य निर्माण करेंगे, यही नई शिक्षा नीति का महत्वपूर्ण संदेश है.
उक्त विचार विभिन्न वक्ताओं ने डेवलपमेंट फाउंडेशन द्वारा चोइथराम इंटरनेशनल स्कूल में ‘नई शिक्षा नीति में अभिभावकों की भूमिका’ पर आयोजित परिचर्चा में व्यक्त किए. मुख्य वक्ता वरिष्ठ शिक्षाविद् चोइथराम स्कूल के डायरेक्टर राजेश अवस्थी ने कहा कि नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों की मानवीय संवेदनाओं और नैतिक-भावनात्मक पक्षों को सशक्त बनाने का प्रयास करती है. विद्यार्थियों को व्यक्तिगत क्षमता के विकास साथ मानवीय एवं सामाजिक मूल्यों, संवेदनाओं को समझने और उसके माध्यम से श्रेष्ठ नागरिक बनाने की राह प्रशस्त करती है. नई शिक्षा नीति इस ओर भी ध्यान देती है कि स्कूलों और अभिभावकों के बीच अधिकाधिक परस्पर संवाद हो जिससे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में मदद मिले, इसके लिए स्कूलों में होने वाली पालक- शिक्षक बैठकों को सोद्देश्य एवं सार्थक बनाने के मिलकर प्रयास करने की जरूरत है. नई शिक्षा नीति में किताबी ज्ञान की अपेक्षा व्यवहारिक शिक्षा को ज्यादा महत्व दिया गया है. इसे अभिभावकों को भी समझना होगा एवं सहयोग करने की जरूरत है.
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कार्यक्रम की अध्यक्षता संयुक्त संचालक शिक्षा इंदौर संभाग अनीता चौहान ने की. प्रारंभ में संयुक्त संचालक शिक्षा अनीता चौहान, डेवलपमेंट फाउंडेशन के ट्रस्टी आलोक खरें, मनोहर देव, रामेश्वर गुप्ता, राजेंद्र जैन आदि ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की अतिथियों का स्वागत रंजना नाईक, रेणु गुप्ता, अमित सर,ऋचा चतुर्वेदी ने किया. डेवलपमेंट फाउंडेशन की गतिविधियों की जानकारी प्रो असद खान ने दी. कार्यक्रम मे शफी शेख, भानु कुमार जैन, आभा जौहरी, प्रणिता दीक्षित, अशोक मित्तल ,दिलीप कनाडे ,जानकी लाल पटेरिया सहित बड़ी संख्या में शिक्षक तथा अभिभावक उपस्थित थे. संचालन कंचन तारे ने किया. श्याम पांडे ने आभार व्यक्त किया।
