इंदौर:शहर में नगर निगम द्वारा मार्जिनल ओपन स्पेस पर राज्य शासन के निर्देश पर संपत्ति कर लगाया जा रहा है. निगम की ओर से यह बताया गया कि यह टैक्स 2020 से लागू कर दिया गया है. नगर निगम के द्वारा इंदौर की जनता से 5 साल का यह टैक्स एक साथ एक मुश्त वसुलने के बिल दिए जा रहे है. यह टैक्स मनमानी का टैक्स है और आम जनता पर एमओएस पर संपत्ति कर लगाना अत्याचार है. कांग्रेस इसके खिलाफ मैदान में विरोध करेगी.
उक्त बात शहर कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने आज पत्रकारों से कही. उन्होंने कहा कि महापौर पुष्यमित्र भार्गव के कार्यकाल में इंदौर नगर निगम की साख पूरी तरह से समाप्त होने की कगार पर है. रामनवमी पर 36 लोगों की मौत के साथ जिस लापरवाही की शुरुआत हुई थी, वह भागीरथपुरा में 36 लोगों की मौत के साथ कायम है. जनता को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में भार्गव की परिषद पूरी तरह से नाकाम रही है. इस समय नगर निगम की हालत दिवालिया सी हो गई है.
कमाई चवन्नी और खर्चा एक रुपए की स्थिति में आ गया है चौकसे ने कहा है कि नगर निगम द्वारा जनता पर अत्याचार किया जा रहा है. 5 साल पुरानी तारीख से नया मार्जिनल ओपन स्पेस टैक्स लगा दिया गया है. हर मकान में 50′ स्थान एमओएस का होता है. इस पर टैक्स लगाकर हर मकान मालिक से 50′ राशि प्रतिवर्ष के हिसाब से 5 वर्ष के 250′ और उस पर सरचार्ज लगाकर वसूलने बिल दिए जा रहे है. शहर में स्थित आठ लाख संपत्ति मालिकों पर उक्त फैसले का असर पड़ेगा. जनता पर भाजपा का यह अत्याचार है और कांग्रेस एमओएस पर संपत्ति कर वसूली का विरोध करती है. इसके खिलाफ मैदान में अभियान चलाएगी।
कम से कम 800 से 3000 रुपए होगा अंतर
चौकसे ने कहा कि नगर निगम के द्वारा मार्जिन ओपन स्पेस का संपत्ति कर वसूली करने की कारवाई की जा रही है. उससे छोटे से छोटे प्लाट पर भी कम से कम रेट जोन वाले क्षेत्र में 800 से लेकर 3000 रुपए प्रति वर्ष तक का अंतर आएगा. इसमें तकरीबन 800 फीट पर 750, 1000 फीट पर 1200, 1500 सौ फीटपर 2400 और 2000 वर्ग फीट के प्लाट पर 2700 रुपए प्रति वर्ष का संपत्ति कर ज्यादा देना पड़ेगा
