इंदौर: प्रदेश के सबसे बड़े शहर इंदौर कलेक्ट्रेट कार्यालय में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है. नगर निगम द्वारा पूरे शहर में ढिंढोरा पीटा जाता है कि नर्मदा के तीन चरण से 485 एमएलडी पानी आ रहा है. हालत यह है कि कलेक्टर कार्यालय के बाबुओं को अपनी जेब से निजी पानी के कंटेनर बुलाना पड़ रहे हैं और यह कंटेनर कई सालों से आ रहे हैं. इतना ही नहीं कलेक्टर कार्यालय में पिछले कई सालों से नए भवन बनने के बाद पानी की व्यवस्था ही नहीं है. खास बात यह है कि कलेक्टर कार्यालय में पेयजल के लिए लगाए सभी वॉटर कूलर बंद पड़े हैं.
प्रदेश के सबसे व्यस्त कलेक्टर कार्यालय इंदौर में आप किसी भी काम के लिए जा रहे हंै तो पीने का पानी साथ लेकर जाएं. इंदौर कलेक्ट्रेट परिसर में कहीं भी पेयजल की व्यवस्था नहीं है. स्थिति यह है कि कलेक्टर, एडीएम और एसडीएम के कार्यालय में पीने के पानी की 5 रुपए वाली बोतल विशिष्ट व्यक्तियों को दी जाती है. इसके अलावा तहसीलदार और नायब तहसीलदार सहित बाकी सभी विभागों में कार्यरत बाबुओं द्वारा निजी पानी सप्लाय एजेंसियों से 20 लीटर का वाटर कंटेनर बुलाया जाता है. यही हालत एडीएम, एसडीएम के बाबुओं के भी है और उनको भी अपने पीने के पानी की व्यवस्था जेब से करना पड़ती है.
ध्यान रहे कि इंदौर कलेक्टर कार्यालय में 20 से ज्यादा विभाग के ऑफिस है और राजस्व से जुड़े सभी मामलों के लिए रोजाना 2 हजार से ज्यादा आमजन आते है. इसमें भी मंगलवार जनसुनवाई के दिन तो बहुत भीड़ होती है. इसके बावजूद कलेक्टर सहित आज तक किसी भी अधिकारी का ध्यान इतने बड़े राजस्व से जुड़े कार्यालय में पानी पर नहीं गया. सभी अधिकारियों और विभागों के बाबुओं द्वारा प्रति माह 1 हजार से 15 सौ रुपए महीने का पानी खरीद कर पी रहे हैं. गर्मी में पानी खरीदने का खर्चा 2 हजार प्रतिमाह तक पहुंच जाता है.
किसी की इच्छा शक्ति नहीं
ऐसा भी नहीं है कि नगर निगम को कलेक्टर बोले और पानी की लाइन या कनेक्शन नहीं दिया जाएगा, लेकिन किसी की इच्छा शक्ति नहीं है और जो चल रहा है, वह चलने दो, की नीति पर है सभी अधिकारी. इससे समझा जा सकता है कि प्रदेश के सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले इंदौर शहर के कलेक्ट्रेट कार्यालय में पेयजल की व्यवस्था नहीं और बाजार से खरीद कर बाबुओं द्वारा पानी की व्यवस्था के जा रही है.
