जबलपुर : घरेलू गैस वितरण व्यवस्था में इन दिनों एक बड़ा विरोधाभास और उपभोक्ताओं के शोषण का मामला सामने आ रहा है। नियमों के मुताबिक यदि कोई उपभोक्ता स्वयं गैस गोदाम जाकर सिलेंडर प्राप्त करता है, तो उसे ‘डिलीवरी चार्ज की छूट मिलनी चाहिए। लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। गैस एजेंसियां उपभोक्ताओं से पूरा पैसा वसूल रही हैं, जिससे आम जनता में भारी आक्रोश है।
नियमों के अनुसार एक 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलेंडर की कुल कीमत में लगभग 33.43 डिलीवरी शुल्क शामिल होता है। यह शुल्क केवल उन उपभोक्ताओं के लिए है जिनके घर तक सिलेंडर पहुँचाया जाता है। यदि उपभोक्ता खुद गोदाम पहुँचकर सिलेंडर लेता है, तो बिल राशि में से यह राशि कम की जानी चाहिए। लेकिन वर्तमान में उपभोक्ताओं से 920 की पूरी राशि वसूली जा रही है। स्थानीय उपभोक्ताओं द्वारा मझौली की सुमन एचपी गैस एजेंसी पर आरोप लगाए गए हैं।
स्टॉक की कमी और एजेंसियों की मनमानी
इस संबंध में जब मझौली के सुमन एचपी गैस एजेंसी मालिक बृज मोहन मरसकोले से बात की गई, तो उन्होंने स्टॉक की कमी का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि ‘342 सिलेंडरों का लोड आते ही मात्र तीन घंटों के भीतर खत्म हो गया। भारी भीड़ के कारण कई उपभोक्ताओं को बिना सिलेंडर लिए ही वापस लौटना पड़ा। हालांकि, एजेंसी संचालकों के पास इस बात का कोई ठोस जवाब नहीं था कि स्वयं सिलेंडर ले जाने वाले ग्राहकों को नियमानुसार छूट क्यों नहीं दी जा रही।
सुबह से लाइन में लगकर भी झेलनी पड़ रही मार
गैस गोदामों पर सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं। उपभोक्ता धर्मेन्द्र सेन एवं अन्य लोगों ने बताया कि, ‘हमें सुबह से ही लाइन में लगना पड़ता है, तब कहीं जाकर घंटों इंतजार के बाद सिलेंडर नसीब होता है। खुद सिलेंडर उठाने और लाइन में लगने के बावजूद हमसे पूरे ?920 लिए जा रहे हैं। हमें किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जा रही है, जो कि सरासर गलत है।
प्रशासनिक दखल की मांग
उपभोक्ताओं का आरोप है कि गैस एजेंसियां जानबूझकर नियमों की जानकारी छिपा रही हैं और उपभोक्ताओं की मजबूरी का फायदा उठा रही हैं। जागरूक नागरिकों ने अब जिला प्रशासन और खाद्य विभाग से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उपभोक्ताओं का कहना है कि जब हम सेवा (डिलीवरी) ले ही नहीं रहे, तो उसका पैसा क्यों दें? उधर गैस एजेंसियों द्वारा की जा रही यह वसूली उपभोक्ता अधिकारों का खुला उल्लंघन है। शासन और संबंधित अधिकारियों को चाहिए कि वे वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाएं और यह सुनिश्चित करें कि नियमों का पालन हो, ताकि आम आदमी की जेब पर पड़ रहा यह अतिरिक्त बोझ कम हो सके।
