सतना:सतना-चित्रकूट मार्ग के संधारण पर एक बार फिर पेंच फस गई है.एन एच आई फिलहाल कुछ करने की स्थिति में नहीं है.एमपीआरडी सी और पी डब्लू डी ने पहले से ही यह कह कर हाथ खड़े कर दिए हैं कि विभाग ने यह सडक़ एनएचआई को सौप दिया है,तो हम उसके रखरखाव में कोई बजट खर्च नहीं कर सकते.
गौरतलब है कि इस वर्ष पूरे तीन महीना हुई बारिश के चलते सतना-चित्रकूट मार्ग की हालत दयनीय हो गई है.
सतना से चित्रकूट पहुंचने पहले जहां लोगों को एक घण्टा दस मिनट लगता था.अब वहां दो घण्टे का समय लगता है.विशेष तौर पर सोलह किलोमीटर घाट के मुख्य मार्ग पर जगह-जगह इतने बड़े गड्ढे हो गए हैं कि लोगों को गाड़ी रोक कर आगे बढने के लिए विवश होना पड़ता है.बताया गया हैकि दीपवली मेला की पहली बैठक में इस ओर घ्यान आकर्षित कराया गया था.
मौके पर मौजूद निर्माण एजेन्सियों के अधिकारियों को कलेक्टर डां सतीश एस ने जब मार्ग को ठीक करने की बात कहीं तो सभी ने असमर्थता व्यक्त करते यह कह दिया कि अब यह सडक़ उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं रही.इस पर कलेक्टर ने अपने मद से गड्ढों में मिट्टी डालवाने के निर्देश एस डी एम को दिए.बताया गया है कि अब जब मेला के लिए चंद दिन शेष बचे हैं तब भी गड्ढें की भराई का काम नहीं किया गया है.
पूर्व के वर्षेंा के अनुभव के आधार पर यह कहा जाता है कि चित्रकूट में दीपावली के दिन होने वाले दीपदान के लिए लाखों श्रृध्दालु आते है.अयोध्या में विकास से पहले यह संख्या कई लाख तक पहुंच जाती थी.वर्तमान में भी बड़ी संख्या में भक्तों यहां पहुंचने की उम्मीद है.उनके लिए खस्ताहाल सडक़ आए दिन मुसीबत का कारण बन सकती है.
फिलहाल बस संचालकों ने भी इस बार सडक़ खराब होने के कारण कम बसें चलने का निर्णय लिया है.कुछ बस संचालकों ने अपनी नई बसेां को मेल में नहीं चलाने का मन बना लिया है.उनका कहना है कि आने-जाने में जितना समय लगना है उसके बाद बसों मेें होने वाली टूट-फू ट उनके लिए अतिरिक्त खर्च बढ़ाएगी.इस मामले मेंं प्रशासन की अनदेखी कहीं सरकार के लिए कोई बड़ी समस्या न पैदा कर दे.समय रहते इस ओर ध्यान दिया जाना आवश्यक है
