
सिवनी। जिले में 3 करोड़ रुपए के हवाला कांड में पुलिस ने एसडीओपी पूजा पांडे समेत 9 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया है। डीजीपी कैलाश मकवाना के निर्देश के बाद 11 पुलिस कर्मियों के खिलाफ डकैती, अवैध रूप से रोकना, अपहरण और आपराधिक षडयंत्र की गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है। मंगलवार को एसडीओपी पूजा पांडे, एसआई अर्पित भैरम, एसडीओपी कार्यालय के आरक्षक माखन इनवाती, योगेंद्र चौरसिया, जगदीश यादव और बंडोल थाने के आरक्षक नीरज राजपूत सहित 9 को गिरफ्तार किया है।
एसआईटी गठित
पुलिस महानिरीक्षक जबलपुर जोन प्रमोद वर्मा ने बताया कि हवाला मामले में एसडीओपी पूजा पांडे समेत कुल नौ की गिरफ्तार कर ली गई है। मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी गई है जिसका नेतृत्व क्राइम ब्रांच जबलपुर जितेन्द्र सिंह को सौंपा गया है। मामले की जांच जारी है जबलपुर कनेक्शन समेत अन्य बिन्दुओं पर जांच चल रही है।
किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा : सी एम
इधर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिवनी प्रकरण में कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा है कि कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि डीएसपी स्तर के अधिकारी की भी गिरफ्तारी की गई है। अन्य पुलिस कर्मचारियों की गिरफ्तारी के साथ थी एफआईआर भी दर्ज की गई है।
[उल्लेखनीय है कि बीते सोमवार को इसी केस में पुलिस ने नागपुर से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने आकाश जैन से 1 करोड़ और अमन गुरनानी से 25 लाख रुपए जब्त किए हैं। कार्रवाई में पुलिस ने अब तक कुल 2 करोड़ 70 लाख रुपए जब्त कर लिए हैं। बचा पैसा कहां है, इसकी जांच अभी भी जारी है। रेंज के आईजी प्रमोद वर्मा के निर्देश पर जबलपुर सिटी एएसपी आयुष गुप्ता ने जांच की तो पाया कि एसडीओपी पूजा पांडे के साथ अन्य पुलिसकर्मी दोषी थे, जिन्होंने कटनी के व्यापारी से रुपए लिए थे।
11 पहले हो चुके हैं सस्पेंड
आरोपी पुलिसकर्मियों पर लखनवाड़ा थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 310 (2) (डकैती), 126 (2) (गलत तरीके से रोकना), 140 (3) (अपहरण) और 61(2) (आपराधिक षडयंत्र) के अंतर्गत आरोप लगाए गए हैं। घटना के तुरंत बाद ही सभी 11 पुलिसकर्मी निलंबित हो चुके थे।
यह था पूरा मामला
सिवनी पुलिस ने नागपुर के शख्स सोहन परमार से करीब 3 करोड़ रुपए जब्त किए थे। पुलिस पर आरोप है कि रिपोर्ट में जब्ती सिर्फ एक करोड़ 45 लाख रुपए की दिखाई। इतना ही नहीं, आरोपी को भी बिना कार्रवाई छोड़ दिया। इसकी जानकारी वरिष्ठ अफसरों को भी नहीं दी। जिसके बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया था।
9 अक्टूबर को सीएसपी पूजा पांडे और एसआई अर्पित भैरम ने यह 1.45 करोड़ रुपए की रकम जमा कराई थी। मामला सामने आने के बाद 9 अक्टूबर की रात को आईजी प्रमोद वर्मा ने थाना प्रभारी अर्पित भैरम समेत 9 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया था। इसके बाद 10 अक्टूबर को डीजीपी कैलाश मकवाना ने एसडीओपी पूजा पाण्डेय को भी सस्पेंड कर दिया था।
