जबलपुर: प्रदेश सरकार ने मां नर्मदा के पानी को प्रदूषित होने से बचाने के उद्देश्य से नर्मदा क्षेत्र के किनारे व अन्य क्षेत्रों में स्थापित डेयरी को हटाकर उन्हें बरगी रोड स्थित खम्हरिया ग्राम में स्थापित करने के लिए तीन साल पहले दुग्ध समृद्वि अभियान शुरु किया था जिसके तहत सरकार ने यहां 70 प्लॉट्स डेयरियों के लिए आवंटित भी किए थे। लेकिन अभी तक 3 साल बीत चुके हैं और खम्हरिया ग्राम के इन प्लॉटों पर सिर्फ 4 डेयरियां ही संचालित हो सकीं हैं।
जबकि करीब 45 डेयरी संचालकों ने प्लॉट्स आवंटित करा तो लिए हैं लेकिन वहां जाने कोई तैयार नहीं हो रहा है। इस संबंध में नाम न छापने की शर्त पर एक डेयरी संचालक ने नवभारत से कहा कि सरकार ने इकाई तो स्थापित कर दी है लेकिन तीन साल बीतने के बावजूद कोई बजट ही आवटिंत नहीं किया है जिसके कारण इकाई योजना का कोई डेवलपमेंट ही नहीं हो पाया है। ऐसे में हम अपनी डेयरी वहां कैसे खोल दें। वहीं इस संबंध में डॉ पीजी नाजपांडे ने नवभारत को बताया कि यदि डेयरी के इस प्रोजेक्ट में तेजी लाना है तो शासन को बजट की व्यवस्था करना चाहिए।
डेयरी संचालक अपनी मनमानी पर उतारू
उधर गौर इलाके व अन्य शहरी क्षेत्रों में डेयरी संचालकों की मनमानी से खुलेआम डेयरियां संचालित की जा रहीं हैं जिससे गौर नदी व उसके आसपास की सहायक नदियों व नर्मदा नदियों में डेयरी की गंदगी बहकर पिछले कई सालों से आ रही है लेकिन खबर होने के बावजूद प्रशासन द्वारा इस गंभीर विषय पर कोई ठोस एक्शन नहीं लिया है।
