जबलपुर:टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश में टागईर के जीवन असुरक्षित होने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि साल 2025 में सबसे अधिक 54 टाइगरों की मौत हुई है। प्रोजेक्ट टाइगर शुरुआत के बाद से एक साल में होने वाली टाइगरों की मौत के मामले में सबसे अधिक है। जिनमें से 57 प्रतिशत टाइगर की मौत का कारण अप्राकृतिक है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका को गंभीरता से लेते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।
भोपाल निवासी वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि दुनिया में टाइगर की कुल आबादी 5, 421 है। जिसमें से भारत में 3167 टाइगर है और उसकी लगभग 25 प्रतिशत आबादी 785 मध्य प्रदेश में है। टागईर स्टेट होने के बावजूद भी साल 2025 में मध्य प्रदेश में 54 टाइगर की मौत हुई है। प्रदेश में साल 2022 में 43 मौतें, साल 2023 में 45 मौतें, साल 2024 में 46 मौतें हुई थी।
इस साल की शुरूआती सप्ताह में ही प्रदेश में 6 टाइगरों की मौत हुई है। बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व ऑफिशियल डेटा के अनुसार लगभग 57 परसेंट मौतें अप्राकृतिक मानी जाती हैं। जिनकी वजह शिकार, करंट लगना या अनजान हालात होते हैं।बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व और शहडोल फ़ॉरेस्ट सर्कल में पिछले तीन सालों (2021, 2022, और 2023) में हुई बाघों की मौत और शिकार की घटनाओं की जांच के लिए एक कमेटी बनाई गई थी।
इन्वेस्टिगेशन कमिटी के चेयरमैन और इंचार्ज स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, भोपाल ने उसमें खुद कहा गया है कि पोस्टमॉर्टम के समय कोई वीडियोग्राफी नहीं की जाती है। मौत के समय प्रिलिमिनरी ऑफेंस रिपोर्ट रिकॉर्ड नहीं की जाती है। इसी तरह, पोस्टमॉर्टम के समय ज़्यादातर वेटनरी डॉक्टर मौजूद नहीं होते हैं और पोस्टमॉर्टम के समय सही सावधानी नहीं बरती जाती है और सबसे ज़रूरी बात ज्यादातर समय टाइगर के “लड़ाई में” होने की रिपोर्ट की जाती है लेकिन कोई सही इन्वेस्टिगेशन नहीं की जाती है।
याचिका में राहत चाही गयी है कि राज्य में बाघों के शिकार को कंट्रोल करने के लिए आवष्यक दिशा -निर्देश जारी किये जाये। एक्सपर्ट्स की सिफारिशों को तुरंत लागू करते हुए संबंधित अधिकारियों के बीच तालमेल स्थापित करने निर्देश दिये जायें। बाघों के संरक्षण के लिए सभी आवष्यक कदम उठाये जायें। रेलवे डिपार्टमेंट के साथ कोऑर्डिनेशन करके रातापानी वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में मिडघाट से बरखेड़ा सेक्शन के बीच अंडर-पास और ओवर-पास बनाएं जायें।
याचिका में केन्द्रीय व राज्य सरकार के वन एव पर्यावरण विभाग नेशनल टाइगर कंज़र्वेशन अथॉरिटी को अनावेदक बनाया गया था। याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी तथा अलका सिंह ने पैरवी की। युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई के दौरान टाइगर के शिकार संबंधित एक अन्य याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी को कोर्ट मित्र नियुक्त करते हुए दोनों की सुनवाई संयुक्त रूप से करने के आदेश जारी किये हैं।
