
शाजापुर। छिंदवाड़ा का सिरप कांड देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है. इस सिरप कांड के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की कार्यवाही पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं. लेकिन इसके उलट छिंदवाड़ा में प्रशासन ने वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण सोनी के खिलाफ कार्यवाही कर दी. जिससे मामला और गर्मा गया. डॉक्टर पर की गई कार्यवाही का देशभर के डॉक्टर विरोध कर रहे हैं. इसी कड़ी में गुरुवार को शाजापुर के जिला अस्पताल में भी डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया. साथ ही कार्यवाही को गलत ठहराते हुए नारेबाजी भी की.
जिला अस्पताल में पदस्थ डॉ. एसडी जायसवाल ने बताया कि प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन की एग्जीक्यूटिव बॉडी की एक ऑनलाईन बैठक हुई थी. इस बैठक में छिंदवाड़ा के डॉ. प्रवीण सोनी पर की गई कार्रवाई की निंदा की गई और सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से 9 अक्टूबर से काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया. इसी के चलते जिला अस्पताल में सभी डॉक्टरों ने नारेबाजी करते हुए इस कार्रवाई का पुरजोर विरोध किया. उन्होंने घोषणा की कि वे काली पट्टी बांधकर अपना चिकित्सीय कार्य करेंगे.
किराना दुकान की तर्ज पर खुल रहे मेडिकल
शहर की बात करें, जिले की बात करें, प्रदेश की बात करें या देशभर की बात करें, कहीं भी मेडिकल खोलना अब किराना दुकान खोलने जैसा हो गया है. किराये की दुकान लो, किसी का भी मेडिकल लाइसेंस किराये पर लो, एजेंसी से दवाई खरीद लो और बैठ जाओ गल्ले पर. ना तो खुद की डिग्री की जरूरत और ना ही किसी परमिशन की. बस समय-समय पर अधिकारियों की जेब गर्म करते रहो, तो कभी आपके मेडिकल की जांच नहीं होगी. और अगर हुई भी, तो कोई अनियमितता नहीं निकलेगी. जिले में भी ऐसे ही सैकड़ों मेडिकल संचालित हो रहे हैं. जिनके मालिक के पास न तो फार्मेसी का लाइसेंस है और न उनके मेडिकल पर इस क्षेत्र में शिक्षित स्टाफ. फिर भी ये धड़ल्ले से बिना डॉक्टर की पर्ची पर दवाएं विक्रय किए जा रहे हैं. ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग क्या कर रहा है. विभाग की कुंभकरणीय नींद कब खुलेगी. विभाग सिर्फ कागजी खानापूर्ति के लिए नहीं, बल्कि आमजनों की सुरक्षा को लेकर कब सख्त होगा. या फिर यूं की लोगों की जान के साथ खुलेआम खिलवाड़ होता रहेगा.
