
मंडला । मध्यप्रदेश के विश्वप्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार हो रही मौतें वन्यजीव संरक्षण की साख पर गहरे प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। अक्टूबर 2025 के शुरुआती दिनों में एक ही दिन में एक नर बाघ और दो मादा शावकों की रहस्यमयी मौत ने जंगल की शांति को भय में बदल दिया। विशेषज्ञ इसे प्रबंधन की लापरवाही और कमजोर निगरानी का नतीजा मान रहे हैं, जबकि स्थानीय गाइड और वनप्रेमी प्रशासन से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं ।
कान्हा टाइगर रिजर्व, जो बाघों की गर्जना और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है, इन दिनों मौतों के सिलसिले से सन्नाटे में डूबा है। जानकारी के अनुसार, इस वर्ष अब तक 40 बाघ और शावकों की मौत दर्ज की जा चुकी है। इनमें टेरिटोरियल फाइट, प्राकृतिक संघर्ष और वयस्क नर बाघ द्वारा शावकों की हत्या जैसी घटनाएं प्रमुख हैं।
अक्टूबर के पहले सप्ताह में हुई तीन मौतों ने वन प्रबंधन की कमजोरी उजागर कर दी है । जिसका जवाब देने प्रबंधन बच रहा है सोशल मीडिया पर विज्ञप्ति जारी कर प्रबंधन ने इसे अपनी इति श्री मान ली है ।राष्ट्रीय टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) का क्विक रिस्पॉन्स प्रोटोकॉल मौजूद होने के बावजूद इन घटनाओं को रोकना संभव नहीं हो सका, जिससे निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय गाइड, सामाजिक संगठन और वन्यजीव प्रेमियों ने मांग की है कि इन मौतों की उच्च स्तरीय जांच की जाए, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो और सभी घटनाओं की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट व प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जिला कलेक्टर व राज्य मुख्यालय को भेजे जाएं।
वन्यजीव विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि यह सिलसिला जल्द नहीं रुका, तो कान्हा जैसा विश्वप्रसिद्ध रिजर्व अपनी बाघ संरक्षण की पहचान खो सकता है और यह वन संपदा अपूरणीय क्षति झेल सकता है ।
