इटारसी। नवरात्रि के पावन अवसर पर हंस गंगा तीर्थ स्थित तिलक सिंदूर मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। मीडिया प्रभारी विनोद वारिवा ने बताया कि पंचमी से ही दूर-दराज़ के क्षेत्रों से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं। नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, चापना, शाहपुर समेत आसपास के ग्रामीण अंचलों से भारी संख्या में लोग आ रहे हैं। इस दौरान आदिवासी समाज की पारंपरिक संस्कृति, रीति-रिवाज और वेशभूषा की झलक देखने को मिल रही है।
रातभर पूजा-अर्चना में लीन आदिवासी श्रद्धालु अपने देवी-देवताओं की आराधना करते हैं और सुबह साज-बाजे, ढोलक व टीमकी की थाप पर नाचते-गाते हुए तीर्थ स्नान करते हैं। परंपरा अनुसार, वे बांस की टोकरी में अपने ‘बाबा’ (देवता) को बैठाकर त्रिशूल व वस्त्र अर्पित करते हैं तथा महुआ के फूल और सजाड़ के पेड़-पत्तों की विशेष पूजा करते हैं। यह तीर्थ स्नान नवमी, दशमी और पूर्णिमा तक चलता है। वहीं, मंदिर में स्थापित प्राकृतिक ज्वारे का विसर्जन कल किया जाएगा।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मीडिया प्रभारी वारिवा ने अपील की है कि गहरे कुंड में स्नान न करें और रात के समय जंगल की ओर न जाएं, क्योंकि वहां जंगली जानवरों की आवाजाही बनी रहती है।
