
सौसर। नागपुर-छिंदवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित सिल्लेवानी घाट केवल प्राकृतिक खूबसूरती का ही केंद्र नहीं है, बल्कि यहां स्थित बंजारी माता मंदिर श्रद्धा और आस्था का भी प्रमुख धाम बन चुका है। करीब एक शताब्दी पूर्व बंजारों द्वारा स्थापित की गई माता की प्रतिमा आज भव्य मंदिर का रूप ले चुकी है। नवरात्रि पर्व के दौरान यहां जिले के अलावा सीमावर्ती महाराष्ट्र से भी हजारों की संख्या में भक्त माता के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पहुंचते हैं।
बंजारों की स्थापना बनी आस्था का केंद्र
मंदिर के इतिहास के अनुसार, बंजारा समुदाय प्राचीन समय में इस मार्ग से आवाजाही करता था। सिल्लेवानी घाट की कठिन चढ़ाई और जोखिम भरे सफर को सुरक्षित बनाने की मंशा से उन्होंने घाट की शुरुआत में माता की प्रतिमा स्थापित की। तब से यह स्थल बंजारी माता मंदिर कहलाने लगा। मान्यता है कि यहां दर्शन करने से यात्रा मंगलमय होती है और किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आती।
हाजिरी लगाने की अनोखी परंपरा आज भी कायम
नागपुर से छिंदवाड़ा की ओर जाने वाले लगभग सभी वाहन आज भी इस परंपरा को निभाते हुए मंदिर के सामने रुककर माता के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता का आशीर्वाद मिलने से साढ़े सात किलोमीटर लंबे सिल्लेवानी घाट का सफर निर्विघ्न पूरा होता है।
नवरात्रि पर विशेष आयोजन
ट्रस्ट कमेटी ने इस नवरात्रि में पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं। सुबह-शाम की आरती में आसपास के गांवों के भक्त पैदल यात्राएं करते हुए मंदिर पहुंच रहे हैं। मंदिर ट्रस्ट कमेटी के अध्यक्ष मोरेश्वर धुर्वे ने बताया कि यहां आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, इसी कारण प्रतिवर्ष श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है।
आस्था से जुड़ा धाम
एक साधारण प्रतिमा से शुरू हुई यह परंपरा आज न केवल धार्मिक स्थल बन चुकी है, बल्कि स्थानीय संस्कृति और आस्था की पहचान भी है। नवरात्रि के दौरान यहां उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि सिल्लेवानी घाट का बंजारी मंदिर श्रद्धा और विश्वास का अनूठा केंद्र है।
