अनियमितताओं को लेकर संघर्ष: मातारानी को सौंपा ज्ञापन

सीहोर। जबसे हाऊसिंग बोर्ड रेल्वे ब्रिज का निर्माण शुरु हुआ है. तभी से उक्त ब्रिज निर्माण में अनियमिततओं को लेकर सवाल खड़े हुए हैं. नागरिकों ने विधायक व कलेक्टर को शिकायत भी की गई. परन्तु आज तक कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है. नतीजतन वार्ड के लोगों द्वारा मातारानी दुर्गा के दरबार में ज्ञापन सौंपा गया.

हाऊसिंग बोर्ड कॉलोनी, नगर सुधार न्यास, संतोष नगर, कृष्णा नागर, दीनदयाल नगर सहित अन्य कालोनी वासियों में काफी आक्रोश व्याप्त है. उक्त ब्रिज के निर्माण में अनियमिततओं के निराकरण के लिए नागरिकों द्वारा एक संघर्ष समिति का गठन कर प्रथम चरण में मातारानी के दरबार में ज्ञापन सौंपकर आन्दोलन की शुरुआत की है. नागरिकों की मांग है कि वर्तमान में निर्माणाधीन ब्रिज की उत्तर दिशा में उपरोक्त कॉलोनियां स्थित हैं जिनका एक मात्र पहुंच मार्ग उक्त निर्माण कार्य के कारण हमेशा के लिए बंद कर दिया है. कालोनी पहुंच मार्ग बंद करने के पूर्व निर्माणाधीन कार्य से संबंधित विभाग का दायित्व था कि उपरोक्त कॉलोनियों को वैकल्पिक एवं व्यवस्थित सुलभ पहुंच मार्ग प्रदाय किया जाए. किन्तु विभाग द्वारा कॉलोनी वासियों की समस्या को नजर अंदाज करते हुए एक ही दिशा से स्तरहीन एवं स्वीकृत भारतीय मानकों के अनुरूप नहीं बनाया है. जिसके परिणामस्वरूप रोज दुर्घटना होती हंै तथा कॉलोनीवासी मानसिक व शारीरिक पीड़ा उठाते हैं.

कालोनीवासियों का कहना है कि उक्त रेल्वे क्रसिंग के दोनों तरफ बड़े-बड़े स्कूल हैं. जिसमें हजारों बच्चे रोजाना उक्त क्रासिंग का उपयोग करके जाते हैं. जिनकी जान की सुरक्षा का संबंधित विभाग द्वारा कोई उपाय नहीं किया गया है. भविष्य में भी निर्माण कार्य पूर्ण होने के उपरांत संबंधित विभाग उपरोक्तानुसार ही असुविधायुक्त एवं मानक स्तरहीन पहुंच मार्ग को निरंतर रखा जाएगा. जो कि एक ही दिशा से जाने व आने का दिया जा रहा है. जिसका आधा निर्माण हो चुका है जिसके कारण रोज दुर्घटना होना निश्चित है, प्रस्तावित निर्माण कार्य आईआरसी के मापदण्डों के अनुरूप भी नहीं किया जा रहा है. जिसकी उच्च स्तरीय जांच किया जाकर मार्ग को विधि व मापदण्डानुसार बनाया जाना आवश्यक है.

आन्दोलन के दूसरे चरण रेल्वे ओवर ब्रिज संघर्ष समिति द्वारा जिलाधीश को सूचना पत्र ज्ञापन के माध्यम से प्रस्तुत किया.15 दिवस की समय अवधि में समस्याओं के समाधान का निराकरण नहीं किया गया तो स्थानीय नागरिकों द्वारा उच्च न्यायालय में जनहित याचिका प्रस्तुत की जाएगी.

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