सतना : शहर में सीवर लाइन के निर्माण कार्य के चलते एक ओर जहां अब तक जहां दो कर्मचारी काल के गाल में समा चुके हैं वहीं दूसरी ओर अब उसकी सफाई भी जानलेवा बन चुकी है. सीवर लाइन के चेंबर की सफाई करने के लिए उतरे 3 कर्मचारियों में से एक की जहां मौके पर ही मौत हो गई, वहीं 2 कर्मचारियों की हालत गंभीर बनी हुई है. गौरतलब है कि अब तक हुईं इस तरह की सभी घटनाओं में ठेका कंपनी प्रबंधन की घोर लापरवाही और नगर निगम के जिम्मेदारों की अनदेखी के बावजूद भी निगम प्रशासन सख्त कार्रवाई करने से परहेज करता रहा है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर से सटे क्षेत्र कृपालपुर हरिजन बस्ती में नगर निगम द्वारा बनाई गई सीवर लाइन के चोक होने की शिकायत सामने आई थी. जिसे देखते हुए एन विराट नामक ठेका कंपनी के 3 कर्मचारियों को सीवर लाइन की सफाई करने के निर्देश दिए गए थे. जिसके चलते गुरुवार की दोपहर तीनों कर्मचारी कृपालपुर हरिजन बस्ती क्षेत्र में त्रिवेणी पैलेस के निकट पहुंच गए. सीवरे लाइन के चेंबर की सफाई करने के लिए तीनों कर्मचारी एक एक करके नीचे उतर गए. लेकिन इस दौरान तीनों कर्मचारियों के पास न तो आक्सीजन मास्क था और न ही सेफ़्टी बेल्ट जैसे सुरक्षा उपकरण.
बताया गया कि नीचे उतरने पर वहां से निकल रही तीव्र और तीक्ष्ण दुर्गंघ के चलते तीनों कर्मचारियों का दम घुटने लगा. जिसके चलते तीनों कर्मचारी बेसुध होकर नीचे गिर गए. काफी देर होने के बावजूद भी नीचे उतरे कर्मचारी बाहर नहीं निकले और न ही किसी तरह की हलचल होती नजर आई, तो बाहर मौजूद लोगों को किसी अनहोनी की आशंका होने लगी. लेकिन इस दौरान बाहर मौजूद लोगों ने समझदारी का परिचय देते हुए सीधे अंदर उतरकर मजदूरों की सहायता करने से परहेज किया. इसी दौरान उक्त मार्ग से एक एंबुलेंस वाहन गुजरा.
जिसे देखते ही वहां पर मौजूद सौरभ सिंह ने उसे रुकवा लिया. एंबुलेंस में उपलब्ध आक्सीजन सिलेंडर और मास्क की मदद से रस्सी बांधकर वे नीचे उतरे. वहां पर तीनों कर्मचारियों को बेसुध पड़ा देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. लेकिन इसके बावजूद भी किसी तरह हिम्मत जुटाते हुए एक एक करके तीनों कर्मचारियों को बाहर निकाल लिया गया. वहीं घटना की जानकारी मिलने पर महापौर योगेश ताम्रकार, नगर निगम की टीम के साथ मौके पर पहुंच गए.आनन-फानन में तीनों कर्मचारियों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया.
लेकिन जांच करने पर चिकित्सक द्वारा संत कुमार उर्फ अमित कुशवाहा निवासी पढुहार बिरसिंहपुर को मृत घोषित कर दिया गया. जिसे देखते हुए जिला चिकित्सालय की मर्चुरी में शव का पोस्टमार्टम कराए जाने के बाद परिजनों को सौंप दिया गया. घटना की जानकारी मिलने पर एसडीएम सिटी राहुल सिलाडिय़ा भी अस्पताल पहुंच गए. घटना के संबंध में जानकारी लेने के साथ ही उन्होंने परिजनों का ढांढस बंधाया.
वहीं घटना के चलते परिजनों का रो रो कर बुरा हाल था. वहीं दो कर्मचारियों की हालत गंभीर पाए जाने पर उन्हें भर्ती करते हुए उपचार शुरु किया गया. काफी देर तक उपचार जारी रहने के बावजूद भी दोनों की हालत नाजुक बनी रही. गौरतलब है कि महज 3 दिन पहले ही शहर के पतेरी क्षेत्र में सीवर लाइन की सफाई करने के लिए उतरे पीसी स्नेहिल कंपनी के दो कर्मचारी आदर्श शुक्ला और किशन वर्मा बेसुध हो गए थे. यह तो गनीमत रही कि ऐन वक्त पर वहां एसडीएम सिटी राहुल सिलाडिय़ा पहुंच गए थे. एसडीएम द्वारा फौरन अस्पताल पहुंचाए जाने से दोनों की जान बच गई थी.
निगम प्रशासन ने साधी चुप्पी
सीवर लाइन की सफाई करने उतरे 1 कर्मचारी की मौत और 2 कर्मचारियों की हालत नाजुक होने जैसी गंभीर घटना सामने आने के बावजूद भी निगम प्रशासन चुप्पी साध ली. निगम प्रशासन की ओर से इस बात की कोई जानकारी साझा नहीं की गई कि मृतक कर्मचारी के परिजनों को राहत पहुंचाने के लिए उनकी ओर से क्या प्रयास किए गए. संबंधित ठेका कंपनी द्वारा बरती गई घोर लापरवाही के चलते उसके विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई. इतना ही नहीं बल्कि गंभीर हालत में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे दोनों कर्मचारियों के उपचार के लिए कहां, कैसे और क्या व्यवस्था कराई गई. गौरतलब है कि अपनी छोटी से छोटी बैठक अथवा निरीक्षण को लेकर हर रोज मुखर होने वाले नगर निगम के जिम्मेदार इस तरह की गंभीर घटना सामने आने के बाद शीत निद्रा में चले गए.
पॉलिटिकल माइलेज का खेल
सीवर लाइन की सफाइ कर रहे कर्मचारी की मौत की घटना की जानकारी मिलते ही विधायक फौरन सक्रिय हो गए. आनन-फानन में जिला प्रशासन और निगम प्रशासन के अधिकारियों से चर्चा करते हुए मृतक कर्मी के परिजनों को 50 लाख रु के मुआवजे और पत्नी को नौकरी की मांग शुरु कर दी गई. इसी कड़ी में कुछ देर बाद यह दावा भी किया जाने लगा कि मृतक कर्मचारी के परिजनों को ठेका कंपनी द्वारा 20 लाख और नगर निगम द्वारा 30 लाख की क्षतिपूर्ति दिए जाने पर सहमति बन चुकी है. लेकिन जानकारों द्वारा विधायक द्वारा की गई इस समूची कवायद को महज पॉलिटिकल माइलेज लेने के खेल के तौर पर बताया जाने लगा. लोगों के अनुसार सीवर लाइन निर्माण कार्य के दौरान शहर के मारुति नगर और राजेंद्र नगर क्षेत्र में हुए हादसे के चलते 1-1 कर्मचारी की मौत हुई थी. उक्त दोनों ही घटनाओं में विधायक कहीं भी नजर नहीं आए थे.
