बैतूल: मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में स्वास्थ्य विभाग ने मानवता की मिसाल पेश की और अवकाश के दिन भी कार्यालय खोलकर एक नवजात की जान बचाई।
शाहपुर निवासी आदिवासी संजय कुमार इवने के डेढ़ महीने के पुत्र अद्विक इवने को जन्म के कुछ ही दिनों बाद सांस लेने में कठिनाई और तेज़ हृदय धड़कन की समस्या शुरू हो गई। नागपुर में ईको जांच में पता चला कि बच्चा गंभीर हृदय रोग से पीड़ित है। परिवार ने रायपुर के सत्य सांई अस्पताल में निःशुल्क इलाज का प्रयास किया, लेकिन सर्दी-खांसी के कारण जांच संभव नहीं हो पाई।
निराश पिता संजय इवने ने जब संबंधित अधिकारी योगेन्द्र कुमार से संपर्क किया, तो उन्होंने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत इंदौर के एक निजी अस्पताल से बातचीत की। डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे के फेफड़ों से हृदय तक जाने वाली नली गलत जुड़ी है और ऑक्सीजन स्तर तेजी से घट रहा है, इसलिए तत्काल ऑपरेशन आवश्यक है।
रिपोर्ट और अनुमानित खर्च प्राप्त होने पर योगेन्द्र कुमार ने सीएमएचओ डॉ. मनोज हुरमाड़े से चर्चा की। डॉ. हुरमाड़े ने दीपावली के अवकाश के दिन भी कार्यालय खुलवाकर शासन की आरबीएसके योजना के तहत 2.75 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की। इस योजना की मदद से परिवार को उस खर्च से राहत मिली, जो सामान्यतः 10 से 12 लाख रुपए तक होता।बचपन की जान बचाने के इस प्रयास ने स्वास्थ्य विभाग की संवेदनशीलता और तत्परता को फिर एक बार साबित किया।
