नयी दिल्ली, 24 सितंबर (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की टेस्ट की तारीखों की अस्पष्टता के कारण मेडिकल टेस्ट में शामिल नहीं हो पाने के कारण चयन से वंचित अनुसूचित जनजाति (एसटी) की उम्मीदवार श्रेया कुमारी तिर्की को राज्य सिविल सेवा में नियुक्त करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने झारखंड उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें तिर्की की उम्मीदवारी खारिज करने के जेपीएससी के फैसले को बरकरार रखा गया था।
झारखंड उच्च न्यायालय ने पहले तिर्की की रिट याचिका और अंतर-न्यायालयीय अपील को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि वह इंटरव्यू के तुरंत बाद निर्धारित मेडिकल टेस्ट में शामिल नहीं हुईं।
शीर्ष अदालत ने पाया कि तिर्की ने प्रारंभिक और मुख्य परीक्षाएं सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की थीं। इंटरव्यू में शामिल हुई थीं और दस्तावेज सत्यापन से गुजरी थीं , हालांकि वह मेडिकल टेस्ट में शामिल नहीं हुईं। अदालत ने कठोर रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि प्रक्रिया न्याय प्रदान करे न कि उसे बाधित करे।
पीठ ने टिप्पणी की, “न्याय की प्रक्रिया को कभी भी किसी भी दमनकारी प्रयोग के जरिए न्याय से वंचित करने या अन्याय को कायम रखने का साधन नहीं बनाया जाना चाहिए।”
शीर्ष अदालत ने कहा कि भले ही उम्मीदवार लापरवाह रहा हो, फिर भी उदारता दिखाई जानी चाहिए थी।
पीठ ने नीतिशा बनाम भारत सरकार मामले में अपने पहले के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि भर्ती निर्देशों का परीक्षण भेदभाव के सिद्धांतों पर भी किया जाना चाहिए। निर्णय में कहा गया, “इसलिए हमें यह मानने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि उम्मीदवार को किस दिन उपस्थित होना है, इसकी उचित स्पष्टता के बिना चिकित्सा परीक्षण के लिए उपस्थित न होना वर्तमान अपीलकर्ता के लिए भेदभावपूर्ण है।”
शीर्ष अदालत ने जेपीएससी को तिर्की के लिए नए सिरे से चिकित्सा परीक्षण कराने का निर्देश दिया। यदि वह योग्य हैं, तो आयोग को एक अतिरिक्त पद सृजित करके उनकी नियुक्ति करनी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह अंतिम चयनित उम्मीदवार के कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से सेवा की निरंतरता, वरिष्ठता और वेतन वृद्धि की हकदार होंगी, लेकिन बीच की अवधि के लिए वित्तीय बकाया नहीं होगा।
