
भुआ बिछिया। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के सरही गेट तक राष्ट्रीय राजमार्ग-30 से जुड़ने वाले मार्ग निर्माण ने किसानों की नींद उड़ा दी है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने और सड़क निर्माण कार्य लगभग समाप्ति पर पहुंचने के बावजूद किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। दो वर्षों से अपनी जमीन गंवा चुके किसान आज भी दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अधिग्रहण के बाद से उन्हें आर्थिक संकट झेलना पड़ रहा है। कई किसानों ने अपनी बाउंड्री वॉल, मेढ़ और फेंसिंग हटाई है, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है। मुआवजे के लिए जब वे संबंधित विभागों में संपर्क करते हैं, तो मंडला भू-अर्जन कार्यालय भेज दिया जाता है। वहां जाकर भी उन्हें छह महीने और प्रतीक्षा करने की बात कही जाती है।
शिकायतों पर भी नहीं हो रही सुनवाई
मुआवजे की मांग को लेकर किसान मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, कलेक्टर मंडला, कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग, एसडीएम बिछिया सहित कई अधिकारियों को लिखित शिकायत कर चुके हैं। यहां तक कि 3 सितंबर 2024 को कलेक्टर जनसुनवाई में क्रमांक 17 पर शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन अब तक किसी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
किसानों का आरोप – बड़े किसानों को मिला लाभ, छोटे वंचित
सरही ग्राम पंचायत के वरिष्ठ कृषक लल्ला यादव का कहना है, “हम छोटे किसानों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। बड़े किसानों को मुआवजा दिया जा चुका है, जबकि हम आज भी खाली हाथ हैं।”
कृषक राजेंद्र कुमार साहू ने कहा, “जिस तत्परता से शासन ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की थी, उसी तरह हमें मुआवजा भी मिलना चाहिए था।”
प्रभावित किसान
रत्नेश यादव, नीरज भट्ट, संजय ठाकुर, नंद कुमार नंदा, विष्णु तिवारी, योगेश गुप्ता, महेश गणेश उयके, ज्योत सिंह ठाकुर, लल्ला यादव, राजेंद्र कुमार साहू सहित कई किसान मुआवजे के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र मुआवजा नहीं दिया गया तो वे सामूहिक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने शासन से मांग की है कि सड़क निर्माण की तरह ही मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में भी तत्परता बरती जाए, ताकि उनकी आजीविका और परिवारों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
