शारदेय नवरात्रि को लेकर शहर सहित जिले भर में सज गए पण्डाल

सतना:पितरों को विदा करने के साथ ही मां शक्ति की उपासना का पर्व शारदेय नवरात्र की तैयारियां चरम पर पहुंचने लगी. एक ओर जहां शहर सहित जिले भर में माता के पण्डाल सज गए वहीं दूसरी ओर पूजन सामग्री, फल-फूल और फलाहार की खरीददारी आरंभ हो गई.महालया के दिन पितृ धरती से विदा होते हैं. जिसे देखते हुए श्राद्ध और तर्पण करते हुए पितरों को विदाई दी गई. वहीं महालया से मां शक्ति के आगमन का संकेत मिलते ही शारदेय नवरात्रि की तैयारियां जोर-शोर से आरंभ हो गईं.

हलांकि माता के आगमन से सप्ताह भर पहले से ही शहर सहित जिले भर में दुर्गा पण्डालों की स्थापना किए जाने का क्रम आरंभ हो गया था. जिसके लिए बांस-बल्ली, पटरे सहित लोहे के पाइप लगाने का काम शुरु हो गया था. लेकिन रविवार को पण्डालों की साज-सज्जा अपने अंतिम चरण में नजर आने लगी. इसके साथ ही पण्डालों के आस पास रंग बिरंगी प्रकाश व्यवस्था ने रौनक बढ़ानी शुरु कर दी.

पूजा पण्डालों के साथ ही तोरणद्वार को सजाने का काम भी लगभग पूरा होता नजर आया. देवी मकंडप से लेकर सडक़ों तक का क्षेत्र रंग बिरंगी और दूधिया रोशनी से जगमगाता दिखाई देने लगा. इसी कड़ी में शहर में लगभग आधा सैकड़ा स्थानों पर मूर्तिकारों द्वारा मां की प्रतिमा को सोमवार तक तैयार करने के लिए पूरी ताकत लगा दी गई है. पूर्व से मिले आर्डर को समय पर पूरा करने के लिए अधिकांश मूर्तिकारों द्वारा बंगाल से अतिरिक्त कारीगरों को बुलाया गया है.

मूर्तिकारों के अनुसार सोमवार को अधिकांश प्रतिमाओं को आयोजन समितियों को सौंप दिया जाएगा. जिसके बाद उन प्रतिमाओं को तैयार किया जाएगा जिनकी स्थापना पंचमी पर होगी. शारदेय नवरात्र को लेकर दुर्गा पूजा आयोजन समितियों के उत्साह का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि रविवार शाम से ही माता के जयकारों और ढोल नगाड़ों के साथ प्रतिमाओं को अपने-अपने पण्डाल तक ले जाने का क्रम आरंभ हो गया.
  10 दिन की होगी नवरात्रि
मां शक्ति को समर्पित शारदेय नवरात्र का पर्व सोमवार मां शैलपुत्री की अराधना के साथ आरंभ हो जाएगा. इस बार माता हाथी पर सवार होकर आ रही हैं. हलांकि नवरात्र की चतुर्थी तिथि 25 सितंबर को पड़ेगी. लेकिन चतुर्थी तिथि की वृद्धि होने के कारण उदयाकालिक चतुर्थी तिथि 26 सितंबर को भी प्राप्त हो रही है. वहीं 1 अक्टूबर को नवमीं और 2 अक्टूबर को दशमी तिथि होगी. यह संयोग 9 वर्ष के बाद आया है. इससे पहले वर्ष 2016 में नवरात्रि 10 दिन की थी. देवी पुराण में हाथी को ज्ञान और समृद्धि का कारक मना गया है.

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