बाढ़ प्रभावित किसानों के साथ खड़ी हैं केंद्र सरकार, स्वयं सहायता समूहों को भी मदद : चौहान

जम्मू/ नयी दिल्ली, 19 सितंबर (वार्ता) केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को जम्मू क्षेत्र का दौरा कर कर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का जायज़ा लिया और कहा कि केंद्र सरकार बाढ़ प्रभावित किसानों के साथ है।

कृषि मंत्री ने इस दौरान किसानों काे फसल नुकसान का मुआवजा देने, बाढ़ से टूटे घरों के लिए वित्तीय सहायता और नुकसान उठाने वाले स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को भी सहायता का भरोसा दिलाया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के किसानों के लिए किसान सम्मान निधि की एक किस्त जल्द जारी करने की बात भी कही।

श्री चौहान ने कहा कि राज्य सरकार से बाढ़ सहायता के लिए मिलने वाले ज्ञापन पर निर्णय शीघ्र किया जाएगा। उन्होंने जम्मू-कश्मीर शासन को उन किसानों को खनन लाइसेंस से छूट देते हुए रेत को बेचने की विशेष अनुमति देने का आग्रहण किया जिनके खेत बाढ़ में रेत से पट गये हैं।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार श्री चौहान ने दौरे में कई जगह जा कर नष्ट हुई फसलों का निरीक्षण किया और खेतों में बाढ़ से आई रेत की समस्या को लेकर भी किसानों एवं अधिकारियों से विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर किसानों को हरसंभव राहत प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में किसानों को इस आपदा से बाहर निकालने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। उन्होंने दु:ख के साथ कहा, “जहां फसलें लहलहा रही थीं, हमने रेत के टीले देखे, यह समय किसानों का दुःख बांटने और समाधान देने का है, राजनीति करने का नहीं।”

उन्होंने कहा कि जहां खेतों में रेत पट गयी है, वहां जम्मू-कश्मीर शासन की ओर से किसानों को अपने खेत की रेत बेचने की विशेष छूट दी जानी चाहिए जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान की फसलें चार से पांच फुट रेत में दबकर बर्बाद हो गई हैं।

श्री चौहान ने कहा, “बाढ़ में पशुधन का भी बड़ा नुकसान हुआ है.. हम मिलकर इस समस्या से निकलेंगे। गृह मंत्रालय हो, जल शक्ति विभाग हो, ग्रामीण विकास या कृषि सभी संबंधित विभागों की टीम आई है। इन्होंने सर्वे किया है। नुकसान का आकलन चल रहा है। राज्य सरकार का ज्ञापन आएगा, इसके बाद हम राहत देने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।’

उन्होंने कहा कि इस मुश्किल के समय में बहुत से काम जम्मू-कश्मीर शासन को करने हैं। राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ) के अंतर्गत जो प्रावधान हैं, उन्हें हम लागू करेंगे। राहत राशि में में 75 प्रतिशत हिस्सा केंद्र और 25 प्रतिशत राज्य सरकार का होता है। आपदा प्रबंधन के लिए राज्य सरकार के पास लगभग 2499 करोड़ रुपये हैं, उसका उपयोग सरकार करेगी। इसके अलावा जो जरूरत होगी, केंद्र सरकार उसके लिए सहायता करेगी।

शिवराज सिंह ने बताया कि एनडीआरएफ जान गंवाने वालों के परिवार को चार लाख रुपये की सहायता दी जाती है, विकलांग होने पर 74 हजार रुपये की राशि दी जाती है। गाद निकालने के लिए 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का प्रावधान है। पहाड़ खिसकने से नुकसान होने पर सीमांत किसानों को 47 हजार रुपये देने का प्रावधान है।

श्री चौहान ने कहा कि मिर्च और धान जैसी फसल का नुकसान हुआ है। बीमित किसानों के नुकसान की पूरी भरपाई करने की कोशिश करेंगे। राहत की राशि के अलावा हम फसल बीमा योजना की राशि देंगे। उन्होंने कहा कि सब्जी और बागबानी फसल के लिए सिंचित क्षेत्र में 17 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का प्रावधान है, कृषि वानिकी के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर का प्रावधान है। ये राशि राज्य सरकार के द्वारा बँटना है। दुधारू पशु के नुकसान पर 37,500 रुपये, घोड़ा और बैल के नुकसान पर 32 हजार रुपये, बछड़ा, टट्टू और खच्चर के नुकसान के लिए 20-20 हजार रुपये का प्रावधान है।

उन्होंने कहा कि नहर क्षतिग्रस्त हैं, बांध के लिए भी राज्य सरकार केंद्र सरकार से बात करे। बाढ़ से कई जगह मकान टूटने के मामलों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने घोषणा की कि 1,30,000 रुपये प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान के लिए दिए जाएंगे। शौचालय निर्माण के अलग और मनरेगा की मजदूरी के लिए 40 हजार रुपये ग्रामीण विभाग देगा। उन्होंने कहा कि 5,101 मकानों के बाढ़ से क्षतिग्रस्त होने की की जानकारी आई है। उन्होंने उनके निर्माण के लिए दिल्ली पहुंच कर सहायता स्वीकृत करने का भरोसा दिया है।।

कृषि मंत्री ने कहा कि एसएचजी की बहनों को नुकसान की भरपायी के लिए 74 करोड़ रुपये की राशि जारी की जाएगी। ग्रामीण सड़कों की मरम्मत के लिए राज्य सरकार जो ज्ञापन देगी, उसकी व्यवस्था ग्रामीण विकास विभाग करेगा।

उन्होंने कहा कि मनरेगा की मजदूरी 100 दिन की होती है, हम राज्य सरकार से अनुरोध करेंगे, 150 दिन की मजदूरी दी जाए।

श्री चौहान ने कहा, “सीमा पर रहने वाले कई किसान जो खेती तो कर रहे हैं लेकिन उनका स्वामित्व नहीं है। राज्य सरकार प्रमाणित कर के दे दे, इतना करने से मैं उन किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि का पात्र बना दूंगा। पीएम किसान सम्मान निधि की एक किश्त हम तुरंत जम्मू-कश्मीर के किसानों के खातों में डालेंगे।”

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