नयी दिल्ली, (वार्ता) मॉयल ने विशाखापत्तनम से इंडोनेशिया को 54,600 टन मैंगनीज अयस्क चूर्ण की अपनी पहली खेप का निर्यात किया है।
इस्पात मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के मुताबिक उसने यह सौदा एक सरकारी व्यापार उद्यम (एसटीई) के रूप में किया है और यह भारत से मैंगनीज अयस्क निर्यात में मॉयल की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
गुरुवार को जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि सरकार ने देश से 46 प्रतिशत मैंगनीज (एमएन) ग्रेड वाले मैंगनीज अयस्क के निर्यात के लिए मॉयल को सरकारी व्यापार फर्म (एसटीई) के रूप में नियुक्त किया है। 46 प्रतिशत एमन ग्रेड वाले अयस्क में मैंगनीज की मात्रा 46-48 प्रतिशत के बीच होती है।
मॉयल ने व्यापार नीति के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में उपरोक्त ग्रेड के मैंगनीज अयस्क के निर्यात के लिए एक व्यवस्था स्थापित की थी, जिसके तहत इस ग्रेड के असस्क का निर्यात मॉयल के माध्यम से ही करना जरूरी है। मॉयल ने 22 अगस्त को विशाखापत्तनम से 54,600 टन अयस्क की पहली खेप इंडोनेशिया भेजी है।
कंपनी अयस्क के घरेलू आपूर्तिकर्ताओं के साथ एक ऐसी व्यवस्था के तहत खरीदारों को इस सामग्री का निर्यात करती है जिसमें आपूर्तिकर्ताओं से माल मिलते ही उसका निर्यात कर दिया जाता है। मंत्रालय का कहना है कि देश से निम्न श्रेणी के मैंगनीज अयस्क (25 प्रतिशत) का निर्यात विशेष महत्व रखता है क्योंकि भारत में निम्न श्रेणी के फाइंस का अधिशेष एमएन अयस्क है। यह घरेलू मांग से कहीं अधिक है। इसलिए निम्न श्रेणी के अयस्क का निर्यात भारत की वैश्विक उपस्थिति को बढ़ाता है और इससे विदेशी आय भी बढ़ती है।
मॉयल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री अजीत कुमार सक्सेना ने अपनी टीम को राज्य व्यापार उद्यम के रूप में मैंगनीज अयस्क की पहली निर्यात खेप के लिए बधाई दी और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को सुगम बनाने के लिए कुशल संचालन और सुविचारित रणनीतियों पर ज़ोर दिया।
