
पिपलियामण्डी। कुछ दिनों पूर्व पिपलिया क्षेत्र में सुनहरे काले-पीले रंग के बैंडेड क्रेट सांप के दिखाई देने के बाद एक बार फिर कनघट्टी मार्ग पर पिपलियामंडी पावागढ़ माताजी मंदिर के पास बुधवार दोपहर क्षेत्रवासियों को एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। यहां दुर्लभ इंडियन क्रेस्टेड साही (भारतीय कलगीदार साही) एक गड्डे में नजर आया। इस जीव को देखकर स्थानीय लोग आश्चर्यचकित रह गए, क्योंकि यह जीव सामान्यतः घने जंगलों और झाड़ियों में ही दिखाई देता है। आबादी वाले क्षेत्र में इसका दिखना वन्य जीव संरक्षण के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह साही पावागढ़ माताजी मंदिर के पास एक गड्ढे में दिखाई दिया। स्थानीय रहवासी जुगलसिंह ने तुरंत इसकी सूचना बरखेड़ापंथ निवासी सर्पमित्र गणपत सालवी को दी। सालवी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाया कि साही के शरीर पर लंबे, नुकीले कांटे होते हैं, जिनका प्रयोग यह आत्मरक्षा में करता है। यही कारण है कि इसे पकड़ना आसान नहीं होता। बाद में स्थानीय लोगों ने गड्ढे में चादर डालकर सावधानीपूर्वक इसे बाहर निकाला और सुरक्षित स्थान पर छोड़ा। सर्पमित्र गणपत सालवी ने बताया कि अंधविश्वास के चलते कई बार लोग इस जीव को मार देते हैं। कुछ लोग इसे खाने का दावा करते हैं और कुछ लोग इसके कांटों का उपयोग तंत्र-मंत्र के लिए करते हैं। लेकिन इन सभी बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। वास्तव में यह एक दुर्लभ वन्य जीव है, जिसका संरक्षण करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। पर्यावरण प्रेमियों ने बताया कि पिपलिया क्षेत्र का वातावरण अनुकूल होने के कारण यहां दुर्लभ जीव-जंतुओं की उपस्थिति बढ़ रही है। इंडियन क्रेस्टेड साही का यहां दिखना इसी का उदाहरण है। इस जीव की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पीठ और शरीर पर उगे लंबे, नुकीले कांटे जैसे बाल हैं, जिनकी मदद से यह स्वयं को खतरे से बचाता है। यह प्रायः जंगल और झाड़ियों में पाया जाता है तथा बहुत कम ही आबादी वाले क्षेत्रों में नजर आता है। विशेषज्ञों और सर्पमित्रों का कहना है कि हर नागरिक का कर्त्तव्य है कि ऐसे दुर्लभ जीवों को नुकसान न पहुँचाए। यदि कहीं ऐसे वन्य जीव दिखाई दें, तो तुरंत वन विभाग या संबंधित संस्था को सूचना दें, ताकि इन्हें सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ा जा सके। यह न केवल जीव की रक्षा करेगा, बल्कि क्षेत्र की जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी मददगार होगा। पिपलिया में इंडियन क्रेस्टेड साही का दिखना न केवल लोगों के लिए रोमांचक अनुभव रहा, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि यदि वातावरण सुरक्षित और अनुकूल बना रहे, तो प्रकृति स्वयं अपने दुर्लभ उपहारों से क्षेत्र को समृद्ध करती है। उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पूर्व क्षेत्र के गांव लूनाहेड़ा में 2 सितम्बर की रात्रि सुनहरे-पीले और काले रंग की धारियों वाला धारीदार करैत (बैंडेड क्रेट) सांप भी दिख चुका है।
