
खंडवा। नगर निगम में बहुमत वाली सत्तारूढ़ भाजपा की परिषद किसी से भी नहीं दब रही है। नियमों को अपने हित में करने के लिए किसी भी तरह से मरोड़ दिया जाता है। नगर निगम की साधारण सभा मर्जी के मुताबिक बुलाई जाती है।
जिम्मेदार अफसर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। नगर निगम में लगभग 55 पार्षद हैं। इसमें से 18 सीटों पर कांग्रेस और समर्थित लोगों की विजय हुई थी। हर 3 महीने में साधारण सभा बुलाकर शहर हित के मुद्दे और जो कार्य कराए गए हैं, उन पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन निगम के जिम्मेदार ऐसा करने से जी चुरा रहे हैं।
सभा नहीं बुलाने की जोखिम कौन ले?
उन्हें पूरा विश्वास है कि यह 18 पार्षद हावी हो जाएंगे। परिषद में बैठक के दौरान ही उनके कार्य की पोल खोल देंगे।
इसलिए बैठकों को टाला जा रहा है। 18 पार्षदों ने नगर निगम के अध्यक्ष से मिलने की कोशिश की उन्हें अपनी मांग का आवेदन देना चाहते थे कि नगर निगम के अधिनियम 1956 के अंतर्गत साधारण सभा बुलाई जाए।
कलेक्टर के पास पहुंचे विपक्षी पार्षद
जब ये पार्षद इस काम में सफल नहीं हो पाए, तो इन्होंने मिलकर कलेक्ट्रेट की शरण ली। कलेक्टर को ज्ञापन देकर मांग की गई है कि साधारण सभा आयोजित करने के लिए उचित कार्रवाई करें या सरकार को यह प्रतिवेदन भेजें कि नियम 1956 का उलझन हो रहा है। कलेक्टर ने भी आवेदन लिया और उचित स्थान पर इसे प्रेषित करने का आश्वासन दिया है। नगर निगम अधिनियम 1956 के अंतर्गत साधारण सभा बुलाने हेतु 18 पार्षदों के समर्थन पत्र के साथ हम नगर निगम अध्यक्ष महोदय से मिलने पहुंचे, परंतु समय न मिलने के कारण अपनी मांग हेतु आवेदन लेकर हम सभी पार्षदगण कलेक्टर महोदय के कार्यालय पहुंचे और साधारण सभा आयोजित करने की मांग रखी।
