
खरगोन। सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय ने देश सहित जिले के शिक्षकों की नींद उड़ा दी है। इस निर्णय के अनुसार कक्षा 8वीं तक पढ़ाने वाले सभी सेवारत शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उतीर्ण करना अनिवार्य किया गया है, चाहे उनकी नियुक्ति की तिथि कुछ भी रही हो। केवल सेवानिवृति में 5 वर्ष से कम समय शेष रहा है उन्हें छूट दी गई है। इसे निर्देश के बाद शिक्षकों में हड़कंप मचा है। जिले में ऐसे करीब 7500 शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ती नजर आ रही रही है। इस फैसले को लेकर मप्र शिक्षक संघ ने सोमवार को आपत्ति दर्ज कराते हुए कलेक्टर के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की।
संघ के जिला उपाध्यक्ष प्रदीप यादव, छगनलाल पाटीदार, सचिव संतोष पटेल, कोषाध्यक्ष नरेंद्र चौहान ने बताया कि शासन द्वारा 1998 से 2005 तक शिक्षाकर्मी, संविदा कर्मियों के रूप में जो भर्तियां की थी, वह शासन के नियमों के तहत और योग्यता के आधार पर ही की थी। ऐसे में टीईटी को अनिवार्य करना न्याय संगत नहीं है। मप्र सरकार द्वारा इस आदेश को लेकर पुनर्विचार याचिका दायर करना चाहिए।
संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष रमेशचन्द्र पाटीदार ने कहा कि इस निर्णय से प्रदेश के 2 लाख से अधिक शिक्षक प्रभावित होंगे। जिन्होंने वैधानिक प्रक्रिया के अंतर्गत नियुक्ति प्राप्त की थीए उनकी सेवा अब असुरक्षित हो गई है। यह स्थिति शिक्षकों के मनोबल को तोड़ेगी और शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी।
एबीआरएसएम ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि यह निर्णय केवल भविष्यलक्षी रूप से लागू हो, 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की सेवा सुरक्षा व गरिमा की रक्षा की जाए और आवश्यक नीतिगत या विधायी उपाय कर लाखों शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित बनाया जाए।
