जबलपुर: पितृ पक्ष में सभी घर और परिवार के सदस्यों द्वारा अपने पूर्वजों को जल देकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। पितरों का तर्पण करने से पितर प्रसन्न होते हैं। साथ ही कहा जाता है कि पितरों के आशीर्वाद से व्यक्ति के काम तो बनते हैं साथ ही परिवार में सुख शांति भी बनी रहती है। इसलिए पितृ पक्ष में पूर्वजों का श्राद्ध और पिंड दान किया जाता है। ऐसा करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है।
तिथियों के अनुसार पितरों का श्राद्ध
पितृ पक्ष का दिन अपने पूर्वजों और पितरों के लिए श्राद्ध कर्म करने का महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि पितृ पक्ष के दिन मृत्यु लोक से पूर्वज धरती लोक पर आते हैं। इसलिए पितृपक्ष के दौरान तर्पण और श्राद्ध करने से पितरों का आशीर्वाद बना रहता है। वहीं, पितृ पक्ष में तिथियों के अनुसार पितरों का श्राद्ध करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इसलिए पितरों की शांति के लिए पितृ पक्ष के दिन श्राद्ध कर्म करने के साथ ब्राह्मणों को भोजन भी कराना चाहिए ।
कुषा घास, आटा, काले तिल के साथ तर्पण
पितृ पक्ष के समय पिंड दान करने के साथ- साथ ही तर्पण भी किया जाता है। तर्पण के लिए लोग कुषा घास, आटा और काले तिल को एक जल में मिलाकर चढ़ाते हैं। साथ ही पितर पक्ष में ब्राह्मण को भोजन भी लोगों द्वारा किया जाता है।
21 सितंबर तक रहेगा पितृ पक्ष
पितृ पक्ष 7 सितंबर से शुरू हो गया था जोकि 21 सितंबर तक रहेगा। ब्रह्म पुराण के मुताबिक मनुष्य को पूर्वजों की पूजा करनी चाहिए और उनका तर्पण करना चाहिए। पितरों का ऋण श्राद्ध के जरिए चुकाया जा सकता है। पितृपक्ष में श्राद्ध करने से पितृगण प्रसन्न रहते हैं। पितृपक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण या पिंडदान किया जाता है।
