बगदाद, 11 सितंबर (वार्ता) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इराकी मिलिशिया द्वारा कई महीनों तक कैद और यातनाएं झेलने वाली एक इजराइली-रूसी शोधकर्ता एलिजाबेथ त्सुर्कोव को रिहा कर दिया गया है। अब वह अमेरिका में सुरक्षित हैं।
सोशल मीडिया पर अपने एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा है, “मुझे बताते हुए यह खुशी हो रही है कि प्रिंसटन की छात्रा एलिजाबेथ त्सुर्कोव को कताइब हिज्जुबुल्लाह ने रिहा कर दिया है। अब वह इराक में अमेरिकी दूतावास में सुरक्षित हैं।”
बीबीसी की रिपोर्ट में बताया गया कि इराकी प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने सुश्री त्सुर्कोव की रिहाई के कुछ ही देर बाद ही इसकी पुष्टि कर दी।
वह मार्च 2023 में इराक में तब लापता हो गई थीं जब एक रिसर्च यात्रा के सिलसिले में वहां गई हुई थीं। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कई महीनों बाद कहा कि उन्हें ईरान समर्थित कताइब हिज्बुल्लाह ने बंदी बना रखा था।
श्री सुदानी ने एक्स पर लिखी पोस्ट में कहा “ सुश्री त्सुर्कोव की रिहाई कई महीनों तक हमारी सुरक्षा सेवाओं द्वारा बड़े पैमाने पर किए गए प्रयासों का परिणाम थी।”
उन्होंने आगे कहा कि सुरक्षा सेवाएं मंगलवार को उस जगह का पता लगाने में सफल रहीं जहां छात्रा को रखा गया था और फिर उसे अमेरिकी दूतावास को सौंप दिया गया।
श्री नेतन्याहू के कार्यालय की ओर से जारी बयान में उस समय कहा था कि सुश्री त्सुर्कोव अपने रूसी पासपोर्ट पर इराक में दाखिल हुई थीं।
गौरतलब है कि कताइब हिज्जबुल्लाह (ईश्वर की पार्टी की ब्रिगेड) एक शक्तिशाली इराकी शिया मिलिशिया है जिसे ईरान से वित्तीय और सैन्य सहायता मिलती है। इसे अमेरिका ने 2009 में एक आतंकवादी संगठन घोषित किया था।
अपने पोस्ट में श्री ट्रंप ने मंगलवार को कहा, “मैं हमेशा न्याय के लिए लड़ता रहूंगा और कभी हार नहीं मानूंगा। हमास, बधकों को अभी रिहा करो।”
श्री ट्रम्प ने यह आह्वान उस फिलिस्तीनी समूह से किया जिसने 7 अक्टूबर 2023 को इजराइल पर अपने घातक हमले के दौरान वहां के लोगों को बंधक बना लिया था।
