
जबलपुर। संतान की लंबी उम्र, सुख और समृद्धि की कामना से रखा जाने वाला पारंपरिक पर्व हल षष्ठी (हरछठ) गुरुवार को मनाया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर महुआ की दातून से मुख शुद्ध किया और महुआ (डोरी) की खली से स्नान कर पूजन-अर्चन की तैयारी की है। परंपरा के अनुसार, इस दिन हल से उगाई गई किसी भी वस्तु का सेवन नहीं किया जाता। मान्यता है कि हल षष्ठी के दिन श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था। इसी कारण शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के बलदाऊ मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई। तमरहाई स्थित बलदाऊ मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। निर्धारित मुहूर्त में बलदाऊ जी का जन्मोत्सव संपन्न हुआ। माताओं ने मिट्टी के बर्तनों में भुनी हुई लाई, महुआ, अनाज, मेवा भरकर, साथ ही पलाश और लता की शाखा लगाकर पूजन किया। पूजा सामग्री में पसही या पसई का चावल विशेष महत्व रखता है। इस चावल का उपयोग व्रत समापन में सदियों से होता आ रहा है।
