रेलवे ने कर्मचारियों को दिल के दौरे के वक्त यात्रियों को बचाने के लिए सीपीआर का प्रशिक्षण दिया

नयी दिल्ली, 08 सितंबर (वार्ता) देश भर में अचानक दिल के दौरे से मौत के मामलों में वृद्धि को देखते हुए उत्तर रेलवे की दिल्ली डिवीजन ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर प्राथमिक चिकित्सा और कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) तकनीक को लेकर कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने के प्रयास तेज कर दिये हैं। कोविड-19 के बाद से लोग दिल के दौरे के ज्यादा शिकार हो रहे हैं।
उत्तरी रेलवे मंडल के अस्पताल में दो सितंबर से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये गये हैं जिसमें रेलवे कर्मचारियों को संकट की स्थिति में फंसे लोगों का जीवन बचाने के उपायों की जानकारी दी गयी। इसमें आनंद विहार टर्मिनल, नई दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन, दिल्ली जंक्शन, गाजियाबाद, करनाल, पानीपत, जींद और रोहतक सहित प्रमुख स्टेशन के कर्मचारी शामिल थे। इसके पहले इसी साल पांच से नौ मई तक पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया कि दिल्ली डिवीजन में चिकित्सकों की एक समर्पित टीम इन सत्रों को संचालित कर रही है। ये प्रशिक्षण रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), वाणिज्यिक और परिचालन विभागों के साथ-साथ आउटसोर्स सहायकों (पोर्टरों) और हाउसकीपिंग कर्मचारियों सहित अग्रिम पंक्ति के कर्मियों के लिए आयोजित हो रहे हैं।
इस कार्यक्रम में सीपीआर, स्वचालित बाह्य डिफिब्रिलेटर (एईडी) के उपयोग और व्यावहारिक आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण उपायों के बारे में जानकारी दी जा रही। श्री उपाध्याय ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य स्टेशन परिसर में आपात स्थिति के दौरान त्वरित और प्रभावी चिकित्सा मुहैया कराना है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा बढ़ सके। उन्होंने कहा कि मई 2025 से अब तक करीब 1900 अग्रिम पंक्ति के कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया। साथ ही सितंबर में पुन: सत्र शुरू होने के बाद 900 अतिरिक्त कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
इस कदम से आपात स्थिति के दौरान रेल यात्रियों या रेलवे प्लेटफॉर्म पर लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है। इस पहल की सराहना करते हुए दिल्ली एम्स में ऑन्को-एनेस्थिसियोलॉजी और पैलिएटिव मेडिसिन के प्रोफेसर और भारतीय पुनर्जीवन परिषद के वैज्ञानिक निदेशक डॉ. राकेश गर्ग ने आपातकालीन स्थितियों में समय पर हस्तक्षेप के महत्वपूर्ण महत्व को रेखांकित किया।
डॉ गर्ग ने कहा,”आंकड़े बताते हैं कि 80 से 82 प्रतिशत दिल का दौरा अस्पताल के बाहर ही आता है, हर बीतते मिनट के साथ मरीज के बचने के संभावना भी सात से 10 प्रतिशत तक कम होती रहती है।” उन्होंने आगे कहा,”इस दौरान उसे सीपीआर देना मरीज के बचने की संभावना को बढ़ाता है। यात्रियों को सीपीआर तकनीक की जानकारी देकर हृदय संबंधी आपात स्थितियों में जान बचाने की संभावना बढ़ा सकते हैं।”
डॉ गर्ग ने यह भी आग्रह किया कि निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों के ऐसे और संस्थानों को आम लोगों सहित सभी के लिए जीवन बचाने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए।

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