शिक्षण संस्थानों में आरक्षण समाप्त करने की साजिश कर रही है सरकार : कांग्रेस

नयी दिल्ली, 05 सितम्बर (वार्ता) कांग्रेस ने कहा है कि सरकार अनुसूचित जाति, जनजाति तथा पिछड़ा वर्ग के बच्चों के हक को भी चुरा रही है और सरकारी संस्थानों को रणनीति के तहत बंद कर शिक्षा व्यवस्था को निजी हाथों में सौंप कर आरक्षण को समाप्त करने की साजिश कर रही है।
कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रमुख राजेंद्र पाल गौतम, आदिवासी कांग्रेस के प्रमुख डॉ विक्रांत भूरिया तथा कांग्रेस ओबीसी विभाग के प्रमुख डॉ अनिल जयहिंद ने शुक्रवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कांग्रेस एससी, एसटी और पिछड़ा वर्ग के बच्चों के संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रही है और उनके हित में जो फैसला न्यायालय से आया है उसको लागू नहीं किया जा रहा है।
श्री गौतम ने कहा कि देश में जनसंख्या बढ़ रही है और उसके हिसाब से सरकारी शिक्षण संस्थानों के बढ़ने चाहिए लेकिन वो नहीं बढ़ रहे हैं। इसके उलट निजी शिक्षण संस्थानों की संख्या लगातार बढ़ी है लेकिन वहां आरक्षण लागू नहीं है इसलिए पैसे के अभाव में एस, एसटी और ओबीसी के बच्चे वहां तक नहीं पहुंच पाते हैं। कांग्रेस सरकार ने कानून बनाया और इन वर्गों के बच्चों को आरक्षण की सुविधा मिली तो कई लोग कोर्ट गए तो 2008 के फैसले में आरक्षण के निर्णय को सही ठहराया गया। फिर 2011 में एक और फैसले में निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण के निर्णय को भी सही ठहराया गया। इतना ही नहीं उच्चतम न्यायालय ने भी 2014 में इस कानून को जायज बताया।
उन्होंने कहा कि बीते साल संसद की एक कमेटी ने विभिन्न संस्थाओं से संवाद किया जिससे पता चला कि निजी शिक्षण संस्थानों में अनुसूचित जाति के सिर्फ 0.89 प्रतिशत छात्र, अनुसूचित जनजाति के 0.53 प्रतिशत और ओबीसी के 11.16 प्रतिशत छात्र हैं। उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द निजी शिक्षण संस्थानों में इन वर्गों के बच्चों के लिए आरक्षण लागू कर कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए मुफ्त कोचिंग की व्यवस्था की जाए।
श्री भूरिया ने कहा कि बाबा साहेब ने सामाजिक समानता लाने के लिए वोट का अधिकार और आरक्षण की बात की थी लेकिन भाजपा इन दोनों अधिकारों को चुरा रही है। साजिश के तहत सरकारी शिक्षण संस्थान धीरे-धीरे बंद कर शिक्षा व्यवस्था निजी हाथों में सौंपी जा रही है। इससे बहुजन समाज की 90 प्रतिशत आबादी को निजी शिक्षण संस्थानों में सिर्फ 12 प्रतिशत जगह मिल रही है जबकि संसदीय समिति ने निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में एसको 15 प्रिशतशत, एसटी को 7.5 प्रतिशत तथा ओबीसी को 27 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
डॉ जयहिंद ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण लागू करने को लेकर जो कानून बनाया था उस पर उच्चतम न्यायालय ने भी फैसला दिया और कहा कि ये कानून लागू होना चाहिए लेकिन मोदी सरकार 11 साल से इस पर कुंडली मारकर बैठी है। श्री मोदी खुद को ओबीसी बताते हैं लेकिन जितना खामियाजा इन 11 साल में इस वर्ग को उठाना पड़ा उतना कभी नहीं हुआ। इतना ही नहीं 2017 के बाद से आज तक नरेन्द्र मोदी क्रीमी लेयर को भी रिवाइज नहीं कर पाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार जातिगत जनगणना की प्रक्रिया पर सक्रिय नजर नहीं आ रही है और इसका कोई रोडमैप भी नहीं बना रही है। सरकार इसको लेकर बात भी नहीं कर रही है और जातिगत जनगणना की बात करने पर ‘अर्बन नक्सल’ का तमगा लगा देते थे। उनका कहना था कि मंडल आयोग की 40 सिफारिशें थीं जिनमें सिर्फ दो लागू हुईं हैं इसलिए शेष 38 मांगों को भी लागू किया जाना चाहिए।

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