मंडला: नगर में करोड़ों की लागत से बिछाई गई सीवरेज लाइन आज आमजन के लिए सिरदर्द बन चुकी है। लगभग चार साल पहले नगर की 140 किलोमीटर लंबाई में लाइन बिछाई गई, इसके लिए जगह-जगह चैम्बर बनाए गए और चौबीस वार्डों की सीसी सड़कें तोड़ दी गईं, लेकिन मरम्मत कार्य आज तक अधूरा है। सरदार पटेल वार्ड, सुभाष वार्ड, हाउसिंग बोर्ड, देवदरा, पड़ाव, स्वामी सीताराम वार्ड समेत कई इलाकों में सड़कें अब खंडहर और मौत के गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। ठेका कंपनी ने मिट्टी-मलबा भरकर खानापूर्ति कर दी, बरसात आते ही यह डस्ट बह गई और सड़कों पर खतरनाक गड्ढे बन गए।
शहर की वर्तमान आबादी 59,248 है और यहां आठ हजार से अधिक मकान हैं। रोजाना हजारों लीटर गंदा पानी सीधे नालियों से होकर नर्मदा नदी में मिल रहा है। डेढ़ दर्जन से ज्यादा नाले नर्मदा को प्रदूषित कर रहे हैं। दावा था कि सीवरेज लाइन से गंदे पानी को रोककर नदी को प्रदूषण से बचाया जाएगा, लेकिन घटिया निर्माण और अफसरों की मिलीभगत ने यह योजना अधूरी कर दी। गौंझी में 7.75 एमएलडी क्षमता का एसटीपी बनाया गया, परंतु भवन और नालियां पहले ही टूटने लगी हैं। ईंट और कंक्रीट की गुणवत्ता इतनी खराब है कि आने वाले सालों में इसकी मरम्मत जनता की जेब पर ही भारी पड़ेगी।
सबसे गंभीर हालात चैम्बरों के हैं। इनमें घटिया ईंट और हल्के ढक्कन लगाए गए जो बाइक तक का भार नहीं झेल पा रहे। कई चैम्बर सड़क से ऊपर-नीचे बने हैं, जो वाहन दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। एक ढक्कन बदला जाता है तो दूसरा टूट जाता है। तकनीकी अफसरों ने कभी इस पर ध्यान नहीं दिया। यही नहीं, घरों से सीवरेज लाइन जोड़ने के लिए हल्के पाइप लगाए गए हैं, जिनकी मजबूती पर शुरू से ही सवाल उठ रहे हैं।
जनता ने कई बार नगर पालिका, ग्राम पंचायत, 181 हेल्पलाइन और जिला कलेक्टर को जनसुनवाई में शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन परिणाम शून्य रहा। यह साफ है कि ठेका कंपनी और एमपीयूडीसी के अफसरों की मिलीभगत से करोड़ों की यह परियोजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है।अब जनता की सीधी अपील है कि प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी तत्काल इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराएं। जनता पूछ रही है कि आखिर जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी? कब तक नर्मदा प्रदूषित होती रहेगी और कब तक सड़कों पर गड्ढों से आमजन की जान खतरे में डाली जाएगी ?मंडला की जनता सरकार से सख्त कदम और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रही है, ताकि करोड़ों की लागत से बनी यह योजना वास्तव में जनता और नर्मदा नदी के हित में पूरी हो सके।
