इंदौर: शहर में शिक्षा विभाग के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में 2.87 करोड़ की राशि के गबन मामले में 5 जिला शिक्षा अधिकारी दोषी पाए गए है. इतना ही नही सभी शिक्षा अधिकारियों ने डीडीओ पॉवर का गलत इस्तेमाल कर गबन किया. सभी पेमेंट सही खातों में जमा किया है, इसकी हर माह जानकारी देना रहती है, लेकिन सभी गलत रिपोर्ट देते रहे.शहर के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में 2 करोड़ 87 लाख रुपए राशि गबन मामले में कलेक्टर शिवम वर्मा द्वारा कराई गई जांच में कई खुलासे हुए हैं.
कलेक्टर वर्मा को 23 दिसंबर को आयुक्त कोष एवं लेखा भोपाल द्वारा शिक्षा विभाग में संदिग्ध भुगतानों की जानकारी दी गई थी. इसके बाद कलेक्टर ने 26 दिसंबर को संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा को मामले की जांच के आदेश दिए. संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा ने उपसंचालक दिव्या शर्मा के साथ 10 सदस्यीय जांच दल गठित किया. जांच दल ने वर्ष 2018 से 2026 तक प्रभारी रहे सभी बीईओ कार्यालय के कर्मचारीयों ले एप्रूवल और क्रिएटर की जांच की गई.
जांच में तत्कालीन 5 एप्रूवलकर्ता बीईओ जिन्हें प्राचार्य रहते हुए बीईओ का प्रभार दिया गया था, उनकी कार्य प्रणाली त्रुटि पूर्ण थी. इनमें खजराना के पूर्व प्राचार्य हीरालाल खुशाल, अनिता चौहान प्रभारी संयुक्त संचालक स्कूल शिक्षा, जिला शिक्षा अधिकारी शांता स्वामी भार्गव, ओपी वर्मा और खोटे सभी 5 प्रभारी बीईओ को दोषी ठहराया है. जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 13 देयकों से संदिग्ध राशि निकाली गई है. जांच में बिंदुवार देयकों से आईएफएमआई एस रिपोर्ट का मिलान किया गया, जिसमें सामने आया है कि देयक सूची में उल्लेखित नाम के साथ बैंक खाता नंबर में बिल जनरेट करते समय छेड़छाड़ की गई.
भृत्य करता था बिल जनरेट
जांच रिपोर्ट में सिद्धार्थ जोशी, भृत्य खजराना हायर सेकेंडरी स्कूल ने रेणु जोशी और मोहक जोशी जो शासकीय कर्मचारी नहीं है, जैसे 7 खातों में वेंडर के नाम से भुगतान किया गया. यह भुगतान नियमित होता रहा है. जांच में बीईओ कार्यालय में पदस्थ कर्मचारियों दिनेश पवार गणक, अतुल त्रिवेदी कार्यालय सहायक, राहुल अहीरे कार्यालय सहायक के कथन लिए गए. बताया गया कि भृत्य सिद्धार्थ जोशी आईएफएमआईएस में सभी बिल जनरेट करता था, जबकि यह उसका काम नहीं था.
कलेक्टर को सौंपी जांच रिपोर्ट
जांच रिपोर्ट में मध्य प्रदेश शासन वित्त विभाग के अनुसार बिंदु क्रमांक 24 के नियमानुसार एफ 1-1 /2015 नियम/25 के सहायक नियम 457 एवं 458 के बिंदु क्रमांक 24 के अनुसार आहरण एवं संवितरण अधिकारी (बीईओ) द्वारा एक माह की अवधि में सभी देयकों को सत्यापित किया जाना था. उक्त अधिकारियों की यह भी जवाबदारी थी कि वह एक माह में ट्रेजरी को बताएं कि सभी भुगतान सही बैंक खातों में किए गए हैं, जिनका उक्त 5 पांचों बीईओ द्वारा पालन नहीं किया गया. इस कारण राशि का गबन होता रहा है. साथ ही हर भुगतान में ओटीपी देने की जवाबदारी भी इन्हीं अधिकारियों की थी. जांच रिपोर्ट संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा द्वारा कलेक्टर को सौंप दी गई है. उक्त मामले में कारवाई के लिए कलेक्टर को मोबाइल पर कॉल किया था, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया.
