वाशिंगटन/नयी दिल्ली, 19 फरवरी (वार्ता) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का किसी भी देश के साथ समझौता करने के लिए पहला विकल्प कूटनीति होता, इसलिए ईरान को अमेरिका के साथ नये समझौते पर बातचीत करना चाहिए।
यह बात व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने गुरुवार (भारतीय समय के अनुसार) कही। उन्होंने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, , “श्री ट्रम्प हमेशा बहुत स्पष्ट रहे हैं। ईरान या दुनिया के किसी भी देश के मामले में कूटनीति हमेशा उनका पहला विकल्प होता है और ईरान के लिए राष्ट्रपति ट्रंप और इस प्रशासन (अमेरिकी प्रशासन) के साथ समझौता करना बहुत समझदारी भरा कदम होगा। ”
सुश्री लेविट ने यह टिप्पणी ऐसे में की है, जब जब जिनेवा में अमेरिका-ईरान के बीचअप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता फिर से शुरू हुई है, जिसमें अमेरिका के दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ओमानी मिल रहे हैं। हालांकि दोनों पक्षों ने ‘कुछ उन्नति’ की बात कही है, लेकिन अधिकारियों ने कहा है कि अभी भी काफी कमियां हैं और फारस की खाड़ी में अमेरिकी सेना की समानांतर बढ़ोतरी बातचीत के बड़े दांव को दर्शाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि श्री ट्रंप की ओर से 2025 की शुरुआत में अपनायी गयी अधिकतम दवाब की नीति ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव डाला है, जिससे अमेरिका के अधिकारी कूटनीति सफलता के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर रहे हैं। इसके बावजूद ईरान प्रतिबंध में राहत की मांग कर रहा है और उसने चेतावनी दी है कि अमेरिका का कोई भी हमला इस इलाके में अमेरिकी सेना के खिलाफ जवाबी कार्रवाई शुरू कर देगा।
सुश्री लेविट का यह बयान अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस के हालिया टिप्पणियों के अनुरूप है, जिन्होंने एक न्यूज़ चैनल को बताया था कि अमेरिकी प्रशासन को कूटनीति के जरिये समस्या का समाधान बहुत पसंद है लेकिन अगर बातचीत विफल हो जाती है तो सैन्य कार्रवाई लेने का विकल्प भी उसके पास है। चूंकि कूटनीति का रास्ता खुला हुआ है, पर्यवेक्षक देख रहे हैं कि क्या ईरान ऐसी संधि को मानेगा जिससे प्रतिबंध कम हो सकें और संभावित संघर्ष टल सके, या क्या बढ़ती सैन्य उपस्थिति दोनों देशों को टकराव की ओर धकेल देगी।
