बनखेड़ी। उमरधा पंचायत में बीमा राशि पाने के लिए पिता और चाचा ने जीवित पुत्र नर्मदा कुशवाहा का ही मृत्यु प्रमाणपत्र बनवा लिया। 10 अप्रैल 2025 को पिता राजेंद्र कुशवाहा और उनके भाई ने तत्कालीन सचिव ओमप्रकाश पटेल को बेटे की मौत की सूचना दी और 12 अप्रैल को बिना जांच के मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करवा लिया। इस आधार पर बीमा दावा पेश किया गया।
29 अगस्त 2025 को एलआईसी अधिकारी जांच के लिए पहुंचे तो पता चला कि नर्मदा जीवित है। अधिकारियों ने पंचनामा बनाकर जानकारी नये सचिव साहब सिंह पटेल और सरपंच जागृति सिंह जूदेव के पिता महेन्द्र सिंह जूदेव को दी। उन्होंने बनखेड़ी थाने में शिकायत की, पर टीआई ने विभागीय जांच का हवाला देकर रिपोर्ट दर्ज नहीं की।
जांच में राजेंद्र ने स्वीकारा कि उसने बताया था पुत्र की मृत्यु हथवास पंचायत में हुई और अंतिम संस्कार सांडिया घाट पर किया गया, जबकि नियम है कि मृत्यु प्रमाणपत्र उसी पंचायत से जारी होता है जहां मौत हुई। दरअसल, नर्मदा की रीढ़ की हड्डी दुर्घटना में टूट चुकी है और वह बिस्तर पर लाचार जीवन बिता रहा है। मामला गंभीर होने पर सीईओ जनपद पंचायत रीना कुम्हारिया ने जांच टीम गठित कर दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है।
